छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन (Natural Division of Chhattisgarh)
छत्तीसगढ़ अपनी विविध भौतिक संरचना, पर्वत श्रृंखलाओं, पठारों, मैदानों और नदी घाटियों के कारण प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। भौतिक बनावट के आधार पर छत्तीसगढ़ को मुख्यतः चार प्राकृतिक भागों में विभाजित किया जाता है। यह विभाजन भू-आकृति, ऊँचाई, मिट्टी, जलवायु तथा प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर किया गया है।
1. जशपुर–सारगुजा उच्चभूमि (Jashpur–Surguja Highlands)
क्षेत्रफल: 6,208 वर्ग किमी (4.59%)
यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। यहाँ पहाड़ी एवं पठारी भू-भाग अधिक मिलता है। इस क्षेत्र की जलवायु अपेक्षाकृत ठंडी तथा वन संपदा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
प्रमुख क्षेत्र
- उत्तरी शारदा/रामगढ़
- लुंड्रा–सीतापुर क्षेत्र
- उदयपुर क्षेत्र
- मैनपाट पठार
विशेषताएँ
- अधिक ऊँचाई वाला क्षेत्र
- घने वन एवं खनिज संसाधनों की उपलब्धता
- पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण
2. पूर्वी छत्तीसगढ़ का पठार (Eastern Chhattisgarh Plateau)
क्षेत्रफल: 21,863 वर्ग किमी (16.16%)
यह क्षेत्र ऊँचे-नीचे पठारी भू-भाग से बना है। यहाँ अनेक छोटी-बड़ी नदियाँ तथा वन क्षेत्र पाए जाते हैं।
प्रमुख क्षेत्र
- केल्हार पूर्वी बेसिन
- गिरवा नदी बेसिन
- चांगभाखर एवं पहाड़ी क्षेत्र
- सोनहत क्षेत्र
विशेषताएँ
- पठारी एवं पहाड़ी भू-आकृति
- वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध
- कृषि अपेक्षाकृत सीमित
3. महानदी बेसिन (Mahanadi Basin)
क्षेत्रफल: 68,064 वर्ग किमी (50.34%)
यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा प्राकृतिक भाग है। इसे राज्य का धान का कटोरा (Rice Bowl of Chhattisgarh) भी कहा जाता है। यहाँ उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी तथा सिंचाई की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध है।
प्रमुख मैदान
- शिवनाथ–महानदी बेसिन
- शिवनाथ पार का मैदान
- बिलासपुर का मैदान
- हसदो–मांड बेसिन
- महानदी नदी संगम मैदान
प्रमुख उच्चभूमियाँ
- मैकल श्रेणी
- उत्तरी उच्चभूमि
- दक्षिणी उच्चभूमि
- पूर्वी उच्चभूमि
विशेषताएँ
- राज्य का प्रमुख कृषि क्षेत्र
- धान का सर्वाधिक उत्पादन
- घनी आबादी एवं प्रमुख शहर स्थित
4. दण्डकारण्य (Dandakaranya Region)
क्षेत्रफल: 39,060 वर्ग किमी (28.91%)
यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में स्थित है और मुख्यतः बस्तर संभाग में फैला हुआ है। यहाँ घने वन, आदिवासी संस्कृति तथा खनिज संपदा की प्रचुरता है।
प्रमुख क्षेत्र
- गोदावरी–इंद्रावती का मैदान
- अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ
- उत्तरी–पूर्वी पहाड़
- दक्षिणी पठार
- कोटरी नदी बेसिन
विशेषताएँ
- घने वन एवं जैव विविधता
- लौह अयस्क एवं अन्य खनिजों की प्रचुरता
- समृद्ध आदिवासी संस्कृति
क्षेत्रफल के आधार पर प्राकृतिक विभाजन
| प्राकृतिक भाग | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | प्रतिशत |
|---|---|---|
| जशपुर–सारगुजा उच्चभूमि | 6,208 | 4.59% |
| पूर्वी छत्तीसगढ़ का पठार | 21,863 | 16.16% |
| महानदी बेसिन | 68,064 | 50.34% |
| दण्डकारण्य | 39,060 | 28.91% |
छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक विभागों का तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study of the Physiographic Divisions of Chhattisgarh)
छत्तीसगढ़ की भौतिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है। भू-आकृति, जलवायु, मिट्टी, नदियों, खनिज संपदा, वनस्पति और जनजातीय जीवन के आधार पर राज्य को चार प्रमुख प्राकृतिक विभागों में विभाजित किया जाता है। इन चारों क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग भौगोलिक एवं आर्थिक विशेषताएँ हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इनका तुलनात्मक अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. पूर्वी छत्तीसगढ़ का पठार
यह क्षेत्र राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है तथा इसका क्षेत्रफल 21,863 वर्ग किमी (16.16%) है। प्रमुख रूप से सरगुजा (पश्चिमी भाग) इसका हिस्सा है।
प्रमुख विशेषताएँ
- भूगर्भीय संरचना: आर्कियन एवं गोंडवाना
- मिट्टी: लाल-पीली
- औसत वर्षा: 125–150 सेमी
- सर्वोच्च चोटी: देवगढ़ (1033 मी.)
- जल प्रवाह: उत्तर दिशा
- मुख्य अपवाह तंत्र: गंगा (सोन नदी का ऊपरी प्रवाह)
- प्रमुख नदियाँ: मांड, रिहंद, कनहर, हसदो, गोपद, बनास
- मुख्य खनिज: कोयला
- वन क्षेत्र: अधिक
- मुख्य फसलें: धान, मोटे अनाज, आलू
- प्रमुख उद्योग: खनिज उत्खनन
- सामाजिक संरचना: जनजाति बहुल
- मुख्य जनजातियाँ: उरांव, कोल, कोरवा
- वनस्पति: उष्णकटिबंधीय साल वन
2. उत्तरी पाट–पठार प्रदेश
यह प्रदेश राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 6,208 वर्ग किमी (4.59%) है। इसका अधिकांश भाग सरगुजा (पूर्वी भाग) में फैला हुआ है।
प्रमुख विशेषताएँ
- भूगर्भीय संरचना: आर्कियन एवं दक्कन ट्रैप
- मिट्टी: लाल-पीली एवं लेटराइट
- औसत वर्षा: 140–150 सेमी
- सर्वोच्च चोटी: गौरलाटा (1225 मी.)
- जल प्रवाह: उत्तर एवं दक्षिण-पूर्व दिशा
- मुख्य अपवाह तंत्र: गंगा एवं महानदी
- प्रमुख नदियाँ: ईब, रेहंद, कनहर
- मुख्य खनिज: बॉक्साइट, कोयला, सोना
- वन क्षेत्र: अत्यधिक
- मुख्य फसलें: धान, आलू, दलहन
- उद्योग: अपेक्षाकृत कम विकसित
- सामाजिक संरचना: जनजाति बहुल
- मुख्य जनजातियाँ: उरांव, कोरवा, गोंड, कोरकू, नगेशिया, बिरहोर
- वनस्पति: उष्ण आर्द्र मानसूनी मिश्रित वन
3. छत्तीसगढ़ का मैदान (महानदी बेसिन)
राज्य का मध्य भाग महानदी बेसिन कहलाता है। यह सबसे बड़ा प्राकृतिक विभाग है जिसका क्षेत्रफल 68,064 वर्ग किमी (50.34%) है। इसमें रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
- भूगर्भीय संरचना: आर्कियन एवं कडप्पा
- मिट्टी: मटासी (लाल-पीली), डोरसा एवं कन्हार
- औसत वर्षा: 125–150 सेमी
- सर्वोच्च चोटी: बदनगढ़ (1176 मी.)
- जल प्रवाह: पूर्व दिशा
- मुख्य अपवाह तंत्र: महानदी
- प्रमुख नदियाँ: महानदी, शिवनाथ, हसदो, मांड, जोंक, पैरी, खारून, अरपा, केलो, इंद्रावती, जोंक, तेल, तांदुला
- मुख्य खनिज: चूना पत्थर, लौह अयस्क, तांबा, डोलोमाइट, हीरा
- वन क्षेत्र: सबसे कम
- मुख्य फसलें: धान, चना, गन्ना
- प्रमुख उद्योग: लौह-इस्पात, एल्यूमिनियम, सीमेंट एवं विद्युत
- सामाजिक संरचना: पिछड़ी एवं अन्य वर्गों की अधिकता
- मुख्य जनजातियाँ: गोंड, कंवर, बिंझवार, हल्बा, भरिया
- वनस्पति: उष्ण आर्द्र मानसूनी मिश्रित वन
4. दण्डकारण्य का पहाड़ी प्रदेश
यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में स्थित है और मुख्यतः बस्तर संभाग में फैला हुआ है। इसका क्षेत्रफल 39,060 वर्ग किमी (28.91%) है।
प्रमुख विशेषताएँ
- भूगर्भीय संरचना: आर्कियन, धारवाड़ एवं कडप्पा
- मिट्टी: लाल, लेटराइट एवं भूरी
- औसत वर्षा: 150–160 सेमी (अबूझमाड़ क्षेत्र में अधिक)
- सर्वोच्च चोटी: बैलाडीला (लगभग 1210 मी.)
- जल प्रवाह: पश्चिम एवं दक्षिण दिशा
- मुख्य अपवाह तंत्र: गोदावरी एवं इंद्रावती
- प्रमुख नदियाँ: इंद्रावती, शबरी, कोटरी, शंखिनी, डंकिनी, नारंगी, जोंक, तालपेर
- मुख्य खनिज: लौह अयस्क, टिन, तांबा एवं मैंगनीज
- वन क्षेत्र: सर्वाधिक
- मुख्य फसलें: धान, कोदो, कुटकी, मक्का, रागी
- प्रमुख उद्योग: खनिज उत्खनन एवं हस्तशिल्प
- सामाजिक संरचना: जनजाति बहुल
- मुख्य जनजातियाँ: गोंड, मुरिया, अबूझमाड़िया, धुरवा, भतरा, दोरला, मारिया, हल्बा, परजा
- वनस्पति: उष्ण कटिबंधीय आर्द्र एवं शुष्क पर्णपाती वन (साल वन)
चारों प्राकृतिक विभागों का संक्षिप्त तुलनात्मक सार
| विशेषता | पूर्वी छत्तीसगढ़ का पठार | उत्तरी पाट-पठार | महानदी बेसिन | दण्डकारण्य |
|---|---|---|---|---|
| क्षेत्रफल (%) | 16.16% | 4.59% | 50.34% | 28.91% |
| स्थिति | उत्तर-पश्चिम | उत्तर-पूर्व | मध्य भाग | दक्षिण भाग |
| प्रमुख मिट्टी | लाल-पीली | लाल-पीली, लेटराइट | मटासी, डोरसा, कन्हार | लाल, लेटराइट |
| वर्षा | 125–150 सेमी | 140–150 सेमी | 125–150 सेमी | 150–160 सेमी |
| वन क्षेत्र | अधिक | अत्यधिक | सबसे कम | सर्वाधिक |
| प्रमुख फसल | धान | धान | धान, चना | धान, कोदो |
| प्रमुख खनिज | कोयला | बॉक्साइट | चूना पत्थर, लौह अयस्क | लौह अयस्क, टिन |
| प्रमुख अपवाह | गंगा | गंगा व महानदी | महानदी | गोदावरी |
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के चारों प्राकृतिक विभाग अपनी भौगोलिक संरचना, प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, वनस्पति और जनजातीय संस्कृति के कारण एक-दूसरे से भिन्न हैं। महानदी बेसिन कृषि एवं औद्योगिक विकास का केंद्र है, जबकि दण्डकारण्य घने वनों, खनिज संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। दूसरी ओर पूर्वी छत्तीसगढ़ का पठार और उत्तरी पाट-पठार प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा और जैव विविधता से समृद्ध हैं। यही विविधता छत्तीसगढ़ को भारत के सबसे विशिष्ट भौगोलिक राज्यों में स्थान दिलाती है और प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।












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