छत्तीसगढ़ की जनजातीय अबूझमाड़िया
परिचय और निवास
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अबूझमाड़िया जनजाति नारायणपुर, दंतेवाड़ा एवं बीजापुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में निवासरत हैं।
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ओरछा को अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार कहा जा सकता है।
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इस जनजाति की कुल जनसंख्या सर्वेक्षण 2002 के अनुसार 19401 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 22 हजार से अधिक हो गई है।
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किवदंतियों के अनुसार माड़िया गोंड़ जाति के प्रेमी युगल सामाजिक डर से भागकर इस क्षेत्र में आकर बस गए थे, और उनके वंशज ही अबूझमाड़ क्षेत्र में रहने के कारण अबूझमाड़िया कहलाये।
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सामान्य रूप से अबूझमाड़ क्षेत्र में निवास करने वाले माड़िया गोंड़ को अबूझमाड़िया कहा जाता है।
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इनका गाँव मुख्यतः पहाड़ियों की तलहटी या घाटियों में बसा रहता है।
कृषि
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ये पेंदा कृषि (स्थानांतरित कृषि) पर निर्भर रहते थे, जिसके कारण इनका निवास अस्थाई होता था।
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पेंदा कृषि हेतु कृषि स्थान को ‘कघई’ कहा जाता है।
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वर्तमान में शासन द्वारा पेंदा कृषि पर प्रतिबंध की वजह से ये लोग स्थाई ग्राम बसाने लगे हैं।
घर और रहन-सहन
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इनके घर छोटे-छोटे झोंपड़ीनुमा लकड़ी व मिट्टी से बने होते हैं, जिनके ऊपर घासफूस की छप्पर होती है।
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घर का निर्माण ये स्वयं करते हैं और इसमें रोशनदान या खिड़कियाँ नहीं पाई जाती हैं।
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घर में बरामदा, “अगाहा” (बैठक), “आंगड़ी” (रसोई), “लोनू” (संग्रहण कक्ष), व बाड़ी होता है।
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‘लोनू’ में ही कुल देवता का निवास स्थान होता है।
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घरेलू सामान में सोने के लिये “अल्पांजी”, बैठने के लिये “पोवई” (चटाई), अनाज कूटने की ‘ढेकी’, ‘मूसल’, और अनाज पीसने का ‘जांता’ होता है।
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भोजन बनाने व खाने-पीने के लिये मिट्टी, एल्यूमिनियम, लोहे व पीतल के बर्तन का उपयोग होता है।
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कृषि उपकरणों में हल, कुदाली, गैंती, रापा (फावड़ा), हसिया इत्यादि का उपयोग करते हैं।
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शिकार के लिये तीर-कमान, फरसा, टंगिया, फांदा और मछली पकड़ने के लिए मछली जाल, चोरिया, डगनी आदि का उपयोग करते हैं।
वेशभूषा और आभूषण
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स्त्रियाँ गोदना को स्थाई गहना मानती हैं। मस्तक, नाक के पास, हथेली के ऊपरी भाग, ठुड्डी आदि पर सामान्य रूप से गोदना गोदवाया जाता है।
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ये गिलट या नकली चाँदी के गहने पहनते हैं।
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पैर में तोड़ा, पैरपट्टी, कमर में करधन, कलाईयों में चूड़ी, सुडेल (ऐंठी), गले में सुता, रुपया माला, चेन व मूंगामाला, कान में खिनवा, झुमका और बाला, नाक में फूली पहनती हैं।
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स्त्रियाँ बालों को अनेक तरह के पिनों से सजाती हैं।
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पुरुष वस्त्र विन्यास में लंगोटी, लुंगी या पछा पहनते हैं और सिर पर पगड़ी बाँधते हैं।
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स्त्रियाँ लुगरा को कमर से घुटने तक लपेटकर पहनती हैं।
खान-पान
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इनका मुख्य भोजन चावल, मड़िया, कोदो, कुटकी, मक्का आदि का पेज और भात, उड़द, मूँग, कुलथी की दाल, जंगली कंदमूल व भाजी, और मौसमी सब्जियाँ है।
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मांसाहार में विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी जैसे पड़की, मोर, कौआ, तोता, बकुला, खरगोश, लोमड़ी, साही, मुर्गा, बकरा का मांस खाते हैं। वर्षा ऋतु में मछली भी पकड़ते हैं।
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महुये की शराब व सल्फी का उपयोग जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कारों में अनिवार्य रूप से होता है।
आर्थिक जीवन
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पहले इनका जीवन आदिम खेती (पेंदा कृषि), शिकार, जंगली उपज संग्रहण, कंदमूल एकत्रित करने पर निर्भर था।
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परंतु अब पेंदा कृषि का स्थान स्थाई कृषि ने ले लिया है और विभिन्न तरह की मजदूरी का कार्य भी सीख गए हैं।
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घर के आस-पास की जमीन पर मक्का, कोसरा, मूंग व उड़द के अलावा मौसमी सब्जियाँ भी बोते हैं।
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कृषि मजदूरी के बदले में इन्हें अनाज मिलता है।
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जंगल से शहद, तेंदूपत्ता, कोसा, लाख, गोंद, धवई फूल, हर्रा, बहेरा इत्यादि एकत्र कर बाजार में बेचते हैं।
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ये छोटे पशु-पक्षियों का शिकार भी करते हैं तथा गाय, बैल, बकरी, सुअर व मुर्गी का पालन करते हैं।
सामाजिक व्यवस्था एवं प्रसव
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अबूझमाड़िया जनजाति पितृवंशीय, पितृनिवास स्थानीय व पितृसत्तात्मक जनजाति है।
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यह जनजाति अनेक वंशों और गोत्रों में विभाजित है, जिन्हें ‘गोती’ कहा जाता है।
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इनके प्रमुख गोत्र अक्का, मंडावी, धुर्वा, उसेंडी, मरका, गुंठा, अटमी, लखमी, वड्डे, थोंडा इत्यादि हैं।
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प्रसव परिवार की बुजुर्ग महिलाएँ या रिश्तेदार कराती हैं। पहले प्रसव के लिये “कुरमा” झोंपड़ा (पृथक से प्रसव झोंपड़ी) बनाया जाता था।
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शिशु की नाल तीर या छुरी से काटी जाती है।
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प्रसूता को पांच दिन तक चावल-दाल की खिचड़ी बनाकर खिलाते हैं तथा हल्दी, सोंठ, पीपर, तुलसी के पत्ते, गुड़, अजवाईन आदि का काढ़ा पिलाते हैं।
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छठें दिन छठी मनाते हैं, प्रसूता व शिशु को नहलाकर नया कपड़ा पहनाकर घर के देवता का प्रणाम कराते हैं और इसी दिन शिशु का नामकरण होता है।
विवाह
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युवकों का विवाह 18-19 वर्ष व युवतियों का विवाह 16-17 वर्ष में होता है।
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विवाह प्रस्ताव वर पक्ष की ओर से आता है। सहमति मिलने पर सूक (वधु धन) तय करते हैं, जो अनाज, दाल, तेल, गुड़, नगद रुपये के रूप में होता है।
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इस जनजाति में वधू को लेकर वधूपक्ष के लोग वर के गाँव में आते हैं और विवाह की रस्म जाति के बुजुर्गों द्वारा वर के घर पर कराई जाती है।
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बिथेर (सहपलायन), ओडियत्ता (घुसपैठ) और चूड़ी पहनाना (विधवा/परित्यक्ता पुनर्विवाह) की प्रथा भी प्रचलित है।
मृत्यु संस्कार
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मृतक को दफनाते हैं, यद्यपि दाह-संस्कार पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
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विशिष्ट और संपन्न व्यक्ति की याद में श्मशान में लगभग 8 फिट ऊंचा 4 फिट गोलाई का चौकोर लकड़ी का खंभा (अनाल गढ़या) गढ़ाते हैं, जिस पर विभिन्न पशु-पक्षी, देवी-देवता व भूत-प्रेत की नक्कासी होती है।
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तीसरे दिन मृत्यु-भोज दिया जाता है।
जाति पंचायत एवं धार्मिक जीवन
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इनमें परंपरागत जाति पंचायत पाया जाता है।
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क्षेत्रीय आधार पर सर्वोच्च व्यक्ति मांझी (मुखिया) होता है, जिनके नीचे पटेल, पारा मुखिया व गायता होते हैं।
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इनके प्रमुख देवी-देवता बूढ़ादेव, ठाकुर देव (टालुमेट), बूढ़ीमाई या बूढ़ी डोकरी, लिंगोपेन, घर के देवता (छोटा पेन, बड़ा पेन, मंझला पेन) व गोत्रानुसार कुल देवता हैं।
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पूजा में मुर्गी, बकरा व सुअर की बलि दी जाती है।
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प्रमुख त्योहार पोला, काकसार व पेंडुम आदि हैं।
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जादू-टोना और भूत-प्रेत के संबंध में अत्यधिक विश्वास करते हैं। तंत्र-मंत्र का जानकार गायता/सिरहा कहलाता है।
नृत्य, गीत और भाषा
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इस जनजाति के स्त्री-पुरुष नृत्य व गीत के अत्यंत शौकीन होते हैं।
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विभिन्न त्योहारों और संस्कारों पर युवक-युवतियां ढोल, मांदर के साथ लोकनृत्य करते हैं। काकसार, गेड़ी नृत्य व रिलो प्रमुख नृत्य हैं।
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लोकगीत में ददरिया, रिलोगींत, पूजागीत, विवाह व सगाई के गीत तथा छठी के गीत गाते हैं।
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ये ‘माड़ी’ बोली बोलते हैं, जो द्रविड़ भाषा परिवार के गोंड़ी बोली का एक रूप है।
साक्षरता
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वर्ष 2002 में कराये गये सर्वेक्षण में अबूझमाड़िया जनजाति में साक्षरता 19.25 प्रतिशत पाई गई थी।
CG PSC की तैयारी के लिए विशेष: अबूझमाड़िया जनजाति पर 25 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CG PSC) और व्यापम की परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ की जनजातियों से जुड़े प्रश्न हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आपकी तैयारी को और मजबूत करने के लिए, हमने ‘अबूझमाड़िया जनजाति’ के रहन-सहन, संस्कृति, और परंपराओं पर आधारित 25 अति महत्वपूर्ण प्रश्नों का यह सेट तैयार किया है। आइए, अपनी तैयारी का आकलन करें!
प्रश्न 1. अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार किस स्थान को कहा जाता है?
A) दंतेवाड़ा
B) ओरछा
C) नारायणपुर
D) बीजापुर
प्रश्न 2. किवदंतियों के अनुसार अबूझमाड़िया जनजाति को किस जनजाति का वंशज माना जाता है?
A) बैगा
B) हल्बा
C) उरांव
D) माड़िया गोंड़
प्रश्न 3. अबूझमाड़िया जनजाति द्वारा की जाने वाली स्थानांतरित (Penda) कृषि के लिए चुने गए स्थान को क्या कहा जाता है?
A) कघई
B) कुरमा
C) लोनू
D) अगाहा
प्रश्न 4. अबूझमाड़िया जनजाति के घरों में बैठक (बरामदा) को किस नाम से जाना जाता है?
A) आंगड़ी
B) अगाहा
C) लोनू
D) सूक
प्रश्न 5. इस जनजाति में ‘लोनू’ (Lonu) का क्या महत्व है?
A) यह रसोईघर है
B) यह अनाज पीसने का स्थान है
C) यह संग्रहण कक्ष और कुल देवता का निवास स्थान है
D) यह प्रसव कक्ष है
प्रश्न 6. अबूझमाड़िया लोग सोने (शयन) के लिए किस सामग्री का उपयोग करते हैं, जिसे वे अपनी बोली में कहते हैं?
A) पोवई
B) जांता
C) अल्पांजी
D) ढेकी
प्रश्न 7. जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी संस्कारों में अबूझमाड़िया जनजाति में किस पेय का उपयोग अनिवार्य रूप से होता है?
A) ताड़ी
B) महुये की शराब व सल्फी
C) हंडिया
D) कोसमा
प्रश्न 8. अबूझमाड़िया जनजाति पितृसत्तात्मक है, इसमें गोत्र (Vansh) को किस नाम से पुकारा जाता है?
A) गोती
B) गायता
C) सिरहा
D) मांझी
प्रश्न 9. प्रसव के लिए बनाए जाने वाले पृथक झोंपड़े को इस जनजाति में क्या कहा जाता है?
A) आंगड़ी
B) कुरमा
C) लोनू
D) कघई
प्रश्न 10. शिशु के जन्म के पश्चात् उसकी नाल काटने के लिए मुख्य रूप से किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
A) कुल्हाड़ी
B) हसिया
C) तीर या छुरी
D) गैंती
प्रश्न 11. अबूझमाड़िया जनजाति में विवाह के दौरान तय किए जाने वाले ‘वधु धन’ (Bride Price) को क्या कहते हैं?
A) पोवई
B) सूक
C) बिथेर
D) ओडियत्ता
प्रश्न 12. इस जनजाति में विवाह की मुख्य रस्म सामान्यतः कहाँ संपन्न कराई जाती है?
A) वधु के घर पर
B) वर के घर पर
C) गाँव के मुखिया के घर पर
D) श्मशान के पास
प्रश्न 13. अबूझमाड़िया जनजाति में प्रचलित ‘बिथेर’ प्रथा का संबंध किससे है?
A) सहपलायन विवाह (Elopement)
B) घुसपैठ विवाह
C) विधवा विवाह
D) अपहरण विवाह
प्रश्न 14. इस जनजाति में ‘ओडियत्ता’ का क्या अर्थ है?
A) तलाक की प्रथा
B) घुसपैठ विवाह
C) मृत्यु-भोज
D) कृषि उपकरण
प्रश्न 15. मृतक की याद में श्मशान में गाड़े जाने वाले लकड़ी के नक्काशीदार खंभे (लगभग 8 फिट ऊंचे) को क्या कहा जाता है?
A) गोती
B) अनाल गढ़या
C) टालुमेट
D) लिंगोपेन
प्रश्न 16. मृत्यु के बाद अबूझमाड़िया जनजाति में ‘मृत्यु-भोज’ किस दिन दिया जाता है?
A) दसवें दिन
B) बारहवें दिन
C) तीसरे दिन
D) पांचवें दिन
प्रश्न 17. अबूझमाड़िया की परंपरागत जाति पंचायत में क्षेत्रीय आधार पर सर्वोच्च व्यक्ति (मुखिया) को क्या कहा जाता है?
A) पटेल
B) मांझी
C) गायता
D) पारा मुखिया
प्रश्न 18. जादू-टोना और भूत-प्रेत के जानकार (Tantrik/Shaman) को इस जनजाति में क्या कहते हैं?
A) मांझी
B) गायता या सिरहा
C) पटेल
D) सूक
प्रश्न 19. इनके प्रमुख देवी-देवताओं में से ‘ठाकुर देव’ को और किस नाम से जाना जाता है?
A) टालुमेट
B) लिंगोपेन
C) बूढ़ादेव
D) बूढ़ी डोकरी
प्रश्न 20. इनमें से कौन सा नृत्य अबूझमाड़िया जनजाति का प्रमुख नृत्य है?
A) करमा
B) सुआ
C) काकसार, गेड़ी व रिलो
D) पंथी
प्रश्न 21. अबूझमाड़िया लोग जो बोली बोलते हैं, उसे क्या कहा जाता है?
A) कुडुख
B) परजी
C) माड़ी
D) हलबी
प्रश्न 22. ‘माड़ी’ बोली किस भाषा परिवार का हिस्सा है?
A) आर्य भाषा परिवार
B) मुंडारी भाषा परिवार
C) आस्ट्रिक भाषा परिवार
D) द्रविड़ भाषा परिवार
प्रश्न 23. वर्ष 2002 के सर्वेक्षण के अनुसार अबूझमाड़िया जनजाति में साक्षरता दर कितनी पाई गई थी?
A) 10.15%
B) 19.25%
C) 25.50%
D) 33.33%
प्रश्न 24. घर में रसोई (Kitchen) के लिए अबूझमाड़िया जनजाति किस शब्द का प्रयोग करती है?
A) अगाहा
B) लोनू
C) आंगड़ी
D) ढेकी
प्रश्न 25. प्रसूता व शिशु को नहलाकर नया कपड़ा पहनाने और नामकरण करने की ‘छठी’ की रस्म किस दिन मनाई जाती है?
A) तीसरे दिन
B) पांचवें दिन
C) छठें दिन
D) दसवें दिन
उत्तरमाला (Answer Key)
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1. B (ओरछा)
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2. D (माड़िया गोंड़)
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3. A (कघई)
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4. B (अगाहा)
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5. C (यह संग्रहण कक्ष और कुल देवता का निवास स्थान है)
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6. C (अल्पांजी)
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7. B (महुये की शराब व सल्फी)
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8. A (गोती)
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9. B (कुरमा)
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10. C (तीर या छुरी)
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11. B (सूक)
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12. B (वर के घर पर)
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13. A (सहपलायन विवाह)
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14. B (घुसपैठ विवाह)
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15. B (अनाल गढ़या)
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16. C (तीसरे दिन)
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17. B (मांझी)
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18. B (गायता या सिरहा)
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19. A (टालुमेट)
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20. C (काकसार, गेड़ी व रिलो)
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21. C (माड़ी)
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22. D (द्रविड़ भाषा परिवार)
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23. B (19.25%)
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24. C (आंगड़ी)
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25. C (छठें दिन)





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