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छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं जनजातीय पृष्ठभूमि

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Table of Contents

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं जनजातीय पृष्ठभूमि

1.1 प्रस्तावना

भारत की जनसंख्या का कुछ भाग शहरों एवं मैदानी ग्रामों से दूर घने जंगलों, पहाड़ियों, घाटियों, तटीय क्षेत्रों में निवासरत हैं। अन्य समाजों की तुलना में इनकी सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य संबंधी विकास पीछे है। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं महान अर्थशास्त्री विष्णुगुप्त चाणक्य ने इनका वर्णन आटविक गणतंत्र तथा आटविक जातियों के रूप में अपने अर्थशास्त्र में किया है। उन्होंने आरण्यक को सामान्य जनजाति एवं आटविक को जुझारू जनजाति माना है। उन्होंने चन्द्रगुप्त की सेना में आटविक बल को महत्व देते हुए भर्ती कराया था। जनसामान्य इन्हें आदिवासी, वनवासी, आदिम जाति, जनजाति, वन्यजाति के रूप में जानते हैं। भारतीय संविधान में इन्हें अनुसूचित जनजाति का नाम देकर विकास की ओर अग्रेसित करने तथा समाज की मुख्य धारा के समकक्ष लाने के उद्देश्य से कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। भारतीय मानव वैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा देश में 635 जनजाति समूह एवं इनकी उपजातियाँ चिन्हित की गई है। जनगणना 2011 के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121,05,69,573 थी, जिनमें अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 10,42,81,037 थी। अर्थात् देश की कुल जनसंख्या में 8.61 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों की थी।

1.2 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत के अत्यंत प्राचीन ग्रंथ वाल्मिकी रामायण में उत्तर कोसल तथा दक्षिण कोसल का उल्लेख मिलता है। उत्तर कोसल सरयु तट पर विस्तृत रूप से फैला था, जिसकी राजधानी अयोध्या थी। दक्षिण कोसल विंध्यपर्वत माला के दक्षिण में फैला हुआ था। इसका विस्तार उत्तर में नर्मदा से लेकर दक्षिण में गोदावरी तक व्याप्त था। दक्षिण कोसल की राजकुमारी कौशल्या का विवाह उत्तर कोसल के महाराज दशरथ के साथ हुआ था। इसी ग्रंथ में राम के वनवास काल प्रसंग में दण्डकारण्य का उल्लेख के साथ वनवासियों का भी विवरण मिलता है। महाभारत के वनपर्व में दक्षिण कोसल का वर्णन इस प्रकार है :-

गोसहस्त्र फलं विन्द्यात् कुलंचैव समुद्धरेत ।

कोसलां तुसमासाद्य, कालतीर्थमुप स्पृशेत ।।

अर्थात् कालतीर्थ (उज्जैन) दक्षिण कोसल के पश्चिम की ओर था। चौथी शताब्दी के समुद्रगुप्त के इलाहाबाद स्तंभ लेख में दक्षिणपथ के राजा कोसलक महेन्द्र तथा महाकान्तारक व्याघ्रराज का उल्लेख है। वराह मिहिर कृत वृहत्संहिता में हीरे की खान के प्रदेशों में कोसल का नाम है। राजा हर्ष रचित रत्नावली में भी कोसल का उल्लेख है। पं. गंगाधार मिश्र कृत कोसलानंदम् महाकाव्य (1664 ई.) के अनुसार-

पुराण पठिता भूमिरियं दक्षिण कोशला ।

युगान्तरेषु भूपालामेष दुर्गसनातनः ।।

17वीं शताब्दी में इस धरा पर छत्तीस अभेद्य दुर्ग होने के कारण इसका नाम छत्तीसगढ़ हो गया। रतनपुर के कवि गोपाल मिश्र ने अपने ग्रंथ “खूब तमाशा” (1868 ई.) में छत्तीसगढ़ शब्द का उपयोग किया था। इसके बाद रतनपुर के प्रसिद्ध विद्वान बाबू रेवाराम ने अपने ग्रंथ “विक्रम विलास” में छत्तीसगढ़ का उल्लेख किया है –

तिनमे दक्षिण कोसल देसा, जहँ हरि ओतु केसरी बेसा,

तासु मध्य छत्तीसगढ़ पावन ………

छत्तीसगढ़ की प्रागैतिहासिक तथा जनजातीय इतिहास भी अत्यंत प्राचीन एवं समृद्ध रहा है। उत्तर में रायगढ़ के सिंघनपुर, कबरापहाड़ के शैल चित्र, सरगुजा के रामगढ़ पहाड़ी के जोगीमाड़ा तथा सीताबेंगरा के भीति चित्र सांस्कृतिक विकास की अमूल्य धरोहर है। दक्षिण में बस्तर के महापाषाण संस्कृति का प्रतिरूप में माड़िया जनजाति का “उर्सकल”/“कोटोकैल”/“अनाल गड़्या” (मृतक स्मृति स्तंभ) भी जनजातीय संस्कृति की प्राचीनता दर्शाती है।

यद्यपि छत्तीसगढ़ के प्रागैतिहासिक शैलाश्रय, शैलचित्र, गुफाएँ यहाँ आदिमानव सभ्यता का ज्वलंत सबूत प्रस्तुत करती हैं, किन्तु विभिन्न जातियों के ऐतिहासिक साक्ष्यों के अभाव में इन्हें किस जाति के पूर्वजों ने निर्मित किया था कहना कठिन है। इतिहासकार, भाषा विदों एवं प्राचीन ग्रंथों के आधार पर छत्तीसगढ़ की प्राचीनतम आदिवासी समूह आस्ट्रीक (कोलारियन) समूह के मुण्डा, कोरवा, खरिया, बिरहोर, नगेसिया, सौंता आदि हैं। इनके पूर्वजों का छत्तीसगढ़ में आगमन ईसा पूर्व 3500 माना जाता है। द्रवीड़ समूह के जनजाति उरांव, गोंड (मुरिया, मारिया, दोरला, परजा) आदि को प्राचीनकाल में सिन्धुघाटी के समीप निवासरत थे माना जाता है। इनका छत्तीसगढ़ में आगमन लगभग 2500 ईसा पूर्व इतिहासकार मानते हैं। आर्य तथा उनके साथ निवासरत व्यवसायोपजीवी पुजारी, गोपालक, कृषक, शिल्पी तथा सेवाकार्य में संलग्न

जातियों का छत्तीसगढ़ आगमन ईसा पूर्व 1500 में माना गया है। छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्र में कृषक, गोपालक, शिल्पी व सेवा में संलग्न जातियों की संस्कृति विकसित हुई। उत्तरीय एवं दक्षिणी क्षेत्र में क्रमशः आस्ट्रींक तथा द्रवीड़ समूह के जनजातीय संस्कृति विकास करते हुए मध्य में विशुद्ध छत्तीसगढ़ी भाषीय संस्कृति तथा उत्तर में छत्तीसगढ़ी की उप बोली सादरी भाषीय संस्कृति दक्षिण में छत्तीसगढ़ी का उप बोली हल्बी भाषीय संस्कृति का विकास माना जाता है।

1.3 जनजातीय पृष्ठभूमि

भारत सरकार द्वारा देश के 27वें राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को किया गया। रायपुर को छत्तीसगढ़ की राजधानी बनाई गई। छत्तीसगढ़ निर्माण के पश्चात् जनता की सुविधा एवं विकास को दृष्टिगत रखते हुए जिले का पुनर्गठन भी किया गया। प्रशासनिक दृष्टिकोण से वर्तमान छत्तीसगढ़ में 5 संभाग क्रमशः रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर एवं दुर्ग हैं। राज्य में 27 जिले यथा – रायपुर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बलौदाबाजार, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर तथा सुकमा जिले हैं। अनुसूचित क्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य के 19 जिलों में फैला हुआ है। इनमें से 13 जिले यथा – बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर तथा कोरबा पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र घोषित हैं। 6 जिले यथा – गरियाबंद, धमतरी, राजनांदगांव, बालोद, बिलासपुर तथा रायगढ़ जिला आंशिक रूप से अर्थात् इनके कई तहसील/विकासखण्ड अनुसूचित क्षेत्र घोषित हैं। जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या 2,55,45,198 थी, जिनमें अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 78,22,902 थी, अर्थात् राज्य की कुल जनसंख्या का 30.60 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों की थी। छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या 32,74,269 थी, जो कुल जनसंख्या का 12.82 प्रतिशत थी। छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग की अनुमानित जनसंख्या 52 प्रतिशत है। अर्थात् राज्य की लगभग 95 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग की है।

संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत् भारत सरकार द्वारा जारी छत्तीसगढ़ राज्य की अनुसूचित जनजाति की सूची में निम्नांकित 42 जनजातियों को शामिल किया गया है:-

  1. अगरिया

  2. आंध

  3. बैगा

  4. भैना

  5. भारिया भूमिया, भुईहर, भूमिया, भूमियाँ, भारिया, पालिहा, पांडो

  6. भतरा

  7. भील, भिलाला, बारेला, पटेलिया

  8. भील मीना

  9. भुंजिया

  10. बियार, बीयार

  11. बिंझवार

  12. डामोर, डामरिया

  13. बिरहुल, बिरहोर

  14. धनवार

  15. गदबा, गदाबा

  16. गोंड, अरख, अर्राख, अगरिया, असुर, बड़ी मारिया, बड़ा मारिया, भटोला, भीम्मा, भूता, कोयला भूता, भार, बाइसन हार्न मारिया, छोटा मारिया, दंडामी मारिया, धुरू, धुरवा, धोबा, धुलिया, दोरला, गायकी, गट्टा, गट्टी, गैटा, गोंड गोवारी, हिल मारिया, कंडरा, कलंगा, खटोला, कोयतर, कोया, खिरवार, खिरवारा, कुचा मारिया, कुचकी मारिया, माडिया, मारिया, माना, मनेवार, मोघ्या, मोघया, मोगिया, मोंघया, मुडिया, मुरिया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राजगोंड, सोनझरी, झरेका, थाटिया, थोट्या, बड़े मारिया, बड्डे मारिया, दरोई

  17. हलबा, हलबी

  18. कमार

  19. कारकू

  20. कवर, कंवर, कौर, चेरवा, तंवर, छत्री

  21. खैरवार, कोंदर

  22. खड़िया

  23. कोंध, खोंड, कंध

  1. कोल

  2. कोलम

  3. कोरकू, बोपेची, मोआसी, निहाल, नाहुल, बोन्धी, बोन्डेया

  4. कोरवा, कोडाकू

  5. माझी

  6. मझवार

  7. मवासी

  8. मुन्डा

  9. नगेशिया, नगाशिया

  10. उरांव, धनका, धनगड़

  11. पाव

  12. परधान, पथारी, सरोती

  13. पारधी, बहेलिया, बहेल्लिया, चीता पारधी, लंगोली पारधी, फांस, पारधी, शिकारी, टकनकर, टकिया [(i) बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, रायगढ़, जशपुरनगर, सरगुजा और कोरिया जिला (ii) कटघोरा, पाली, करतला और कोरबा तहसील-कोरबा जिला (iii) बिलासपुर, पेण्ड्रा, कोटा और तखतपुर तहसील-बिलासपुर जिला (iv) दुर्ग, पाटन, गुण्डरदेही, धमधा, बालोद, गुरूर और डौंडी लोहारा-दुर्ग जिले में (v) चौकी, मानपुर और मोहला राजस्व निरीक्षक सर्किल-राजनांदगांव जिले में (vi) महासमुंद, सराईपाली और बसना तहसील-महासमुंद जिले में (vii) बिन्द्रानवागढ़, राजिम और देवभोग तहसील-रायपुर जिले में और (viii) धमतरी, कुरूद और सिहावा तहसील-धमतरी जिले में]

  14. परजा

  15. सहारिया, सहरिया, सेहारिया, सोसिया, सोर

  16. साओता, सौंता

  17. सौर

  18. सवर, सवरा

  19. सोंर

उपर्युक्त 42 जनजातियों में से क्र. 7. भील, भिलाला, बारेला, पटेलिया, 8. भील मीना, 12. डामोर डामरिया, 19. कारकू, 26. कोरकू, बोपची, मोआसी, निहाल, नाहुल, बोन्धी, बोडेन्या, 30. मवासी, 38. सहारिया, सहरिया, सेहारिया, सोसिया, सोर, 40. सौर, 42. सोंर मध्य प्रदेश मूल की अनुसूचित जनजातियाँ हैं। 2. आंध, 25. कोलम महाराष्ट्र मूल की अनुसूचित जनजातियाँ हैं।

1.4 वर्गीकृत विशेषताएँ

छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजातियों का वर्गीकृत विशेषताएँ संक्षिप्त में निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर दिया जा रहा है :-

  1. भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर

  2. आर्थिक जीवन के आधार पर

  3. सामाजिक आर्थिक विकास

  4. भाषा (बोली) वैज्ञानिक आधार पर

  5. प्रजाति वर्गीकरण के आधार पर

  6. जनसंख्या के आधार पर

1.4.1 भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर

छत्तीसगढ़ के जनजातियों को भौगोलिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से 3 भागों में विभाजित किया जा सकता है :-

(1.1) उत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र (सरगुजा संभाग)

इस क्षेत्र में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर जिले तथा रायगढ़, कोरबा जिले के पहाड़ी क्षेत्रों की जनजातियों को सम्मिलित किया जा सकता है। यह क्षेत्र घने जंगलों व पहाड़ियों से आच्छादित है। इस क्षेत्र में मुख्यतः उरांव, कंवर, मुण्डा, नगेसिया, कोरवा, भूइंहर, भूमिया, धनवार, सौंता, बियार, मझवार, माझी, खरिया, सवरा, बिरहोर, कोंध, खैरवार, गोंड, बैगा, अगरिया आदि जनजातियाँ निवास करती हैं।

(1.2) मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र (बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग संभाग)

इस क्षेत्र में बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़ एवं कोरबा जिले के मैदानी क्षेत्र, महासमुंद, रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, कवर्धा (कबीरधाम) आदि जिले के जनजातियों को सम्मिलित किया जा सकता है। इस क्षेत्र में समतल मैदानी क्षेत्र, जंगल व पहाड़ियों युक्त भाग आते हैं। इस क्षेत्र में गोंड, हलबा, कमार, भुंजिया, अगरिया, बैगा, कोंध,सवरा, कंवर, शिकारी पारधी, बिंझवार, धनवार, सौंता, भैना, परधान आदि जनजातियाँ निवास करते हैं।

(1.3) दक्षिणी सांस्कृतिक क्षेत्र (बस्तर संभाग)

इस क्षेत्र में दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बस्तर, नारायणपुर और कांकेर जिले के जनजातियों को सम्मिलित किया जा सकता है। यह क्षेत्र घने वनों व पहाड़ियों से आच्छादित है। इस क्षेत्र में हलबा, अबूझमाड़िया, गदबा, परजा, दोरला, भतरा, मुरिया, माडिया, गोंड आदि जनजातियाँ निवास करती हैं।

1.4.2 आर्थिक जीवन के आधार पर

छत्तीसगढ़ की जनजातियों को उनके आर्थिक जीवन के आधार पर निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है :-

(2.1) खाद्य संग्रहक व शिकारी जनजातियाँ

इस समूह की जनजातियाँ मुख्यतः कंदमूल, फल, जंगली भाजी संग्रह करते तथा खरगोश, हिरण, गोह, लोमड़ी आदि का शिकार कर खाते हैं। इस वर्ग में बिरहोर तथा पहाड़ी कोरवा आते हैं।

(2.2) आदिम कृषक, शिकारी, खाद्य संकलक जनजातियाँ

इस समूह की जनजातियाँ कंदमूल, फल संग्रह, शिकार, मछली पकड़ने के अतिरिक्त जंगल के पेड़ों को काटकर व जलाकर उस पर आदिम कृषि भी करते हैं। इस समूह में बैगा, अबूझमाड़िया, कमार, माझी, पण्डो आदि जनजातियाँ आती हैं। बैगा व पण्डो जनजाति “बेवरा” और कमार तथा अबूझमाड़िया “पेंदा” कहते हैं।

(2.3) कृषक जनजातियाँ

इस समूह की जनजातियाँ जंगली उपज संग्रह व शिकार के साथ स्थायी कृषि करते हैं। इस वर्ग में बिंझवार, सवरा, गोंड, मुरिया, हलबा, भतरा, भुंजिया, भूमिया, बियार, कंवर, मझवार, मुण्डा, भैना, नगेसिया आदि आते हैं।

(2.4) उन्नत कृषि जनजातियाँ

इस वर्ग में वे जनजातियाँ है जो पूर्व में जागीरदार, मालगुजार आदि थे। इस समूह की जनजातियों में तंवर, राजगोंड, बिलासपुर, रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा, जांजगीर-चांपा आदि जिले के

समतल मैदानी क्षेत्रों के ग्रामों में अन्य जातियों के साथ निवासरत गोंड जनजाति आते हैं।

2.5) शिल्पकार जनजातियाँ

इस वर्ग की जनजातियाँ जंगली उपज संग्रह, शिकार, आदिम कृषि के साथ-साथ बांस से टोकरी, “झऊँहा”, “सूपा” बनाते हैं। इस समूह में कमार, कंडरा, धनवार, सौंता, बैगा, माझी, दोरला आदि जनजाति आते हैं। शिकारी पारधी जनजाति के लोग छींद के पत्तों से झाड़ू, चटाई, टोकरी आदि बनाते हैं। बिरहोर एवं खोण्ड जनजाति मोहलाइन छाल से व उरई से रस्सी बनाते हैं। अगरिया लौह पत्थर (अयस्क) को गलाकर प्राप्त लोहा से कृषि उपकरण बनाते हैं।

2.6) कला-कौशल व अन्य कार्यों में संलग्न जनजातियाँ

गोंड की उपजाति परधान, किन्नरी बजाकर, लोकगीत गाकर तथा ओझा गोंड डहकी बजाकर महादेव जी का लोकगीत गाकर अन्य गोंड जनजाति के घर भिक्षा मांगते हैं। ओझा गोंड महिलाएँ गोदना गोदने का कार्य करती हैं। खैरवार जनजाति के लोग खैरवृक्ष से कत्था बनाते हैं।

1.4.3 सामाजिक तथा आर्थिक विकास के आधार पर

विकास के आधार पर छत्तीसगढ़ की जनजातियों को निम्नलिखित चार वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है :-

(3.1) अविकसित जनजातियाँ

इस समूह में आने वाली जनजातियाँ अभी सामाजिक, आर्थिक विकास की दृष्टि से काफी पीछे हैं। इस वर्ग में कमार, अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरवा, बैगा, बिरहोर, पाण्डो आदि जनजातियाँ आती हैं।

(3.2) अल्प विकसित जनजातियाँ

इस समूह की जनजातियाँ सामाजिक, आर्थिक विकास की ओर अग्रसर हैं, किन्तु इनका विकास अभी अल्प विकसित स्थिति तक हो पाई है। इस वर्ग में मुरिया, माड़िया, अगरिया, भतरा, भूमिया, धनवार, खरिया, माझी, मझवार, नगेसिया, पारधी शिकारी, परजा, भुंजिया, सौंता आदि आते हैं।

(3.3) विकासशील (विकास के समीप अग्रसर) जनजातियाँ

इस समूह में आने वाली जनजातियाँ विकसित होकर शासकीय सुविधाओं का समुचित उपयोग कर रही हैं। इनका सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक

यहाँ दिए गए चित्रों में मौजूद जानकारी को आसानी से समझने योग्य रूप में टाइप किया गया है:

विकसित जनजातियाँ और भाषा के आधार पर वर्गीकरण

  • स्थिति अन्य पिछड़ा वर्ग के कई जातियों के समकक्ष पहुँच चुकी हैं।

  • इस वर्ग में कंवर, भैना, गोंड, परधान, सवरा, गदबा, कोंध, मुण्डा आदि आते हैं।

  • (3.4) विकसित जनजातियाँ: इस समूह में आने वाली जनजातियाँ शासकीय, आर्थिक विकास कार्यक्रम, शिक्षण, बाह्य संपर्क आदि का लाभ लेकर उपरोक्त अन्य जनजातियों की अपेक्षा विकसित हो चुकी है।

  • शासकीय सेवाओं में जनजातियों के लिए आरक्षित पदों पर इस समूह के अधिकांश लोग कार्य कर रहे हैं।

  • इस वर्ग में राजगोंड, तंवर, हलबा, उरांव आदि आते हैं।

1.4.4 भाषा के आधार पर

छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातियों को भाषाई आधार पर मुख्यतः तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:-

  • (4.1) आर्य भाषा परिवार की बोली: इस समूह में वे जनजातियाँ आती हैं जो अपनी परंपरागत मूल बोली को भूलकर स्थानीय क्षेत्रीय बोली या क्षेत्रीय व मूल बोली का मिश्रित रूप बोलती हैं।

  • इस वर्ग में छत्तीसगढ़ी बोलने वाली जनजाति कंवर, बिंझवार, भुंजिया, धनवार, भैना, बैगा, हलबा आदि।

  • (4.2) आस्ट्रीक भाषा परिवार की बोली: इस समूह में कोलारियन व मुण्डारी भाषा समूह की बोली बोलने वाली जनजातियाँ आती हैं।

  • जैसे – मुण्डा (मुण्डारी बोली), कोरवा (कोरवा बोली), माझी (माझी बोली), खरिया (खरिया बोली), गदबा (गदबा बोली), बिरहोर व सवरा आदि।

  • (4.3) द्रविड़ भाषा परिवार की बोली: कुछ जनजाति वर्ग इस भाषा समूह की बोली बोलते हैं।

  • जैसे – गोंड (गोंडी या कोया), उरांव (कुडुख बोली), कोंध (कुई बोली), दोरला (दोरली बोली), परजा (परजी बोली) आदि।

1.4.5 प्रजातीय लक्षणों के आधार पर

  • छत्तीसगढ़ की समस्त अनुसूचित जनजातियों में प्रोटो-आस्ट्रोलॉयड प्रजातीय लक्षण पाये जाते हैं।

  • यह लक्षण मुण्डा, उरांव, बैगा, गोंड आदि जनजातियों में अधिक स्पष्ट परिलक्षित होती है।

जनसंख्या के आधार पर वर्गीकरण

1.4.6 जनसंख्या के आधार पर

(हाथ से लिखे नोट के अनुसार: गोंड की जनसंख्या अधिकतम (max) और परजा की न्यूनतम (min) है।)

जनगणना 2011 की जनसंख्या के आधार पर छत्तीसगढ़ के जनजातियों को निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है :-

(6.1) 25 लाख से अधिक

    1. गोंड एवं उपजातियाँ – 42,98,404

(6.2) 10 लाख से 25 लाख तक

  • कोई जनजाति नहीं

(6.3) 5 लाख से 10 लाख तक

    1. कंवर – 8,87,477

    1. उरांव – 7,48,789

(6.4) 1 लाख से 5 लाख तक

    1. हलबा – 3,75,182

    1. भतरा – 2,13,900

    1. सवरा – 1,30,709

    1. कोरवा – 1,29,429

    1. बिंझवार – 1,19,718

    1. नगेसिया – 1,14,532

    1. भूमिया, भुंईहर भूमिया – 1,13,967

(6.5) 50 हजार से 1 लाख तक

    1. बैगा – 89,744

    1. खैरवार – 79,816

    1. अगरिया – 67,196

    1. माझी – 65,027

    1. भैना – 55,975

    1. मझवार – 55,320

    1. धनवार – 50,995

(6.6) 25 हजार से 50 हजार तक

    1. खरिया – 49,032

    1. कमार – 26,530

(6.7) 10 हजार से 25 हजार तक

    1. कोल – 20,873

    1. मुण्डा – 15,095

    1. पारधी, शिकारी, बहेलिया – 13,476

    1. पाव – 12,729

    1. परधान – 11,111

    1. कोंध – 10,991

    1. भुंजिया – 10,603

(6.8) 5 हजार से 10 हजार तक

    1. गदबा – 8,535

    1. बियार – 5,525

(6.9) 1 हजार से 5 हजार तक

    1. सौंता – 3,502

    1. बिरहोर – 3,104

    1. परजा – 1,212 

साक्षरता के आधार पर वर्गीकरण

1.4.7 साक्षरता के आधार पर

(हाथ से लिखे नोट के अनुसार: हलबा जनजाति की साक्षरता अधिकतम (max) और सौंता की न्यूनतम (min) है।)

  • जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातियों में कुल साक्षरता 59.1 प्रतिशत है।

  • पुरुषों व स्त्रियों की साक्षरता क्रमशः 69.7 व 48.8 प्रतिशत है।

  • साक्षरता के आधार पर छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातियों को निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है :-

(7.1) 70 प्रतिशत से अधिक

    1. हलबा – 76.2 (पु.-86.6, म.-66.2)

    1. परधान – 70.7 (पु.-81.3, म.-60.5)

(7.2) 60 से 70 प्रतिशत

    1. उरांव – 68.9 (पु.-76.6, म.-61.4)

    1. कंवर – 67.0 (पु.-79.1, म.-55.2)

    1. सवरा – 65.0 (पु.-76.4, म.-53.9)

    1. कोंध – 64.7 (पु.-77.4, म.-55.2)

    1. मुण्डा – 62.6 (पु.-73.3, म.-51.8)

    1. खैरवार – 61.5 (पु.-72.7, म.-50.3)

    1. पाव – 61.4 (पु.-72.4, म.-50.0)

    1. गदबा – 61.1 (पु.-73.2, म.-49.5)

    1. बिंझवार – 60.9 (पु.-73.8, म.-48.0)

    1. भैना – 60.5 (पु.-72.5, म.-48.7)

    1. बियार – 60.1 (पु.-73.7, म.-46.7)

(7.3) 50 से 60 प्रतिशत

    1. भुंजिया – 58.9 (पु.-74.6, म.-43.8)

    1. कोल – 58.3 (पु.-69.2, म.-47.4)

    1. गोंड – 56.7 (पु.-67.5, म.-46.2)

    1. खरिया – 56.2 (पु.-66.8, म.-46.3)

    1. परजा – 55.2 (पु.-64.4, म.-46.5)

    1. नगेसिया – 51.4 (पु.-61.5, म.-41.2)

(7.4) 40 से 50 प्रतिशत

    1. भतरा – 48.7 (पु.-60.2, म.-37.6)

    1. भूमिया, भुंईहर भूमिया – 48.5 (पु.-57.8, म.-39.1)

    1. कमार – 47.7 (पु.-58.8, म.-37.0)

    1. अगरिया – 47.0 (पु.-52.2, म.-37.0)

    1. पारधी – 45.2 (पु.-54.7, म.-35.7)

    1. माझी – 44.1 (पु.-54.6, म.-33.5)

    1. धनवार – 41.7 (पु.-51.2, म.-32.0)

    1. बैगा – 40.6 (पु.-50.4, म.-30.8)

(7.5) 30 से 40 प्रतिशत

    1. बिरहोर – 39.0 (पु.-49.6, म.-28.7)

    1. कोरवा, कोड़ाकू – 38.7 (पु.-46.2, म.-31.1)

    1. मझवार – 38.3 (पु.-47.0, म.-29.5)

    1. सौंता – 33.0 (पु.-40.4, म.-25.6) 

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं जनजातीय पृष्ठभूमि MCQ टेस्ट (भाग-1)

1. छत्तीसगढ़ राज्य का गठन कब हुआ?

(A) 15 अगस्त 1947
(B) 1 नवंबर 2000 ✅
(C) 26 जनवरी 1950
(D) 2 अक्टूबर 2001

2. छत्तीसगढ़ भारत का कौन-सा राज्य है?

(A) 25वाँ
(B) 26वाँ
(C) 27वाँ ✅
(D) 28वाँ

3. छत्तीसगढ़ की राजधानी कौन है?

(A) बिलासपुर
(B) दुर्ग
(C) रायपुर ✅
(D) जगदलपुर

4. चाणक्य ने जनजातियों को किस नाम से संबोधित किया?

(A) आर्य
(B) आटविक ✅
(C) द्रविड़
(D) निषाद

5. अर्थशास्त्र के रचयिता कौन थे?

(A) कालिदास
(B) चाणक्य ✅
(C) वाल्मीकि
(D) व्यास

6. दक्षिण कोसल की राजकुमारी कौन थीं?

(A) सीता
(B) द्रौपदी
(C) कौशल्या ✅
(D) उर्मिला

7. उत्तर कोसल की राजधानी थी?

(A) उज्जैन
(B) अयोध्या ✅
(C) रायपुर
(D) रतनपुर

8. रामायण में किस वन क्षेत्र का उल्लेख मिलता है?

(A) सुंदरवन
(B) दण्डकारण्य ✅
(C) गिर वन
(D) कान्हा वन

9. छत्तीसगढ़ नाम पड़ने का कारण क्या माना जाता है?

(A) 36 नदियाँ
(B) 36 मंदिर
(C) 36 दुर्ग ✅
(D) 36 जनजातियाँ

10. “खूब तमाशा” ग्रंथ के लेखक कौन थे?

(A) बाबू रेवाराम
(B) गोपाल मिश्र ✅
(C) गंगाधार मिश्र
(D) वाल्मीकि

11. “विक्रम विलास” ग्रंथ के लेखक कौन थे?

(A) गोपाल मिश्र
(B) बाबू रेवाराम ✅
(C) चाणक्य
(D) वराहमिहिर

12. सिंघनपुर के शैलचित्र किस जिले में स्थित हैं?

(A) रायगढ़ ✅
(B) बस्तर
(C) दुर्ग
(D) कोरिया

13. जोगीमाड़ा गुफा किस जिले में है?

(A) रायपुर
(B) सरगुजा ✅
(C) कोरबा
(D) धमतरी

14. छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजातियों की संख्या कितनी है?

(A) 32
(B) 36
(C) 42 ✅
(D) 45

15. जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ में ST जनसंख्या कितनी थी?

(A) 50 लाख
(B) 60 लाख
(C) 78,22,902 ✅
(D) 90 लाख

16. छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या में ST प्रतिशत कितना है?

(A) 25.5%
(B) 30.60% ✅
(C) 35.8%
(D) 40%

17. छत्तीसगढ़ में कितने संभाग हैं?

(A) 4
(B) 5 ✅
(C) 6
(D) 7

18. बस्तर संभाग किस सांस्कृतिक क्षेत्र में आता है?

(A) उत्तर
(B) मध्य
(C) दक्षिणी ✅
(D) पूर्वी

19. अबूझमाड़िया जनजाति मुख्यतः कहाँ निवास करती है?

(A) सरगुजा
(B) रायगढ़
(C) बस्तर ✅
(D) रायपुर

20. पहाड़ी कोरवा किस वर्ग की जनजाति है?

(A) विकसित
(B) विकासशील
(C) अविकसित ✅
(D) उन्नत

21. बैगा जनजाति किस प्रकार की कृषि करती है?

(A) सिंचित कृषि
(B) बेवरा कृषि ✅
(C) जैविक कृषि
(D) आधुनिक कृषि

22. कमार जनजाति की कृषि पद्धति कहलाती है?

(A) पेंदा ✅
(B) झूम
(C) हलमा
(D) पट्टा

23. खाद्य संग्रहक एवं शिकारी जनजाति कौन-सी है?

(A) बिरहोर ✅
(B) हलबा
(C) कंवर
(D) गोंड

24. छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति कौन है?

(A) उरांव
(B) गोंड ✅
(C) कंवर
(D) हलबा

25. गोंड जनजाति की जनसंख्या लगभग कितनी है?

(A) 20 लाख
(B) 30 लाख
(C) 42,98,404 ✅
(D) 50 लाख

26. कंवर जनजाति की जनसंख्या कितनी है?

(A) 5 लाख
(B) 8,87,477 ✅
(C) 10 लाख
(D) 12 लाख

27. उरांव जनजाति किस भाषा परिवार से संबंधित है?

(A) आर्य
(B) आस्ट्रिक
(C) द्रविड़ ✅
(D) तिब्बती

28. गोंड जनजाति की बोली क्या है?

(A) हल्बी
(B) गोंडी ✅
(C) सादरी
(D) कुड़ुख

29. उरांव जनजाति की बोली क्या कहलाती है?

(A) गोंडी
(B) हल्बी
(C) कुड़ुख ✅
(D) सादरी

30. कोरवा जनजाति किस भाषा परिवार से जुड़ी है?

(A) आर्य
(B) द्रविड़
(C) आस्ट्रिक ✅
(D) फारसी

31. छत्तीसगढ़ की कुल जनजातीय साक्षरता कितनी है?

(A) 50%
(B) 55%
(C) 59.1% ✅
(D) 65%

32. जनजातीय पुरुष साक्षरता कितनी है?

(A) 60%
(B) 65%
(C) 69.7% ✅
(D) 75%

33. जनजातीय महिला साक्षरता कितनी है?

(A) 48.8% ✅
(B) 52%
(C) 56%
(D) 60%

34. सर्वाधिक साक्षर जनजाति कौन-सी है?

(A) गोंड
(B) उरांव
(C) हलबा ✅
(D) कंवर

35. हलबा जनजाति की साक्षरता दर कितनी है?

(A) 70%
(B) 72%
(C) 76.2% ✅
(D) 80%

36. न्यूनतम साक्षरता वाली जनजाति कौन-सी है?

(A) बिरहोर
(B) सौंता ✅
(C) बैगा
(D) कमार

37. सौंता जनजाति की साक्षरता कितनी है?

(A) 25%
(B) 30%
(C) 33% ✅
(D) 40%

38. छत्तीसगढ़ में ST सूची किस अनुच्छेद के अंतर्गत जारी होती है?

(A) 340
(B) 341
(C) 342 ✅
(D) 343

39. खैरवार जनजाति किस कार्य के लिए प्रसिद्ध है?

(A) लोहा गलाना
(B) कत्था बनाना ✅
(C) शिकार
(D) कृषि

40. अगरिया जनजाति का प्रमुख कार्य क्या है?

(A) मछली पकड़ना
(B) लोहा गलाना ✅
(C) खेती
(D) व्यापार

41. परधान जनजाति किससे लोकगीत गाती है?

(A) मादर
(B) किन्नरी ✅
(C) ढोल
(D) शहनाई

42. छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति जनसंख्या प्रतिशत कितना है?

(A) 10%
(B) 12.82% ✅
(C) 15%
(D) 18%

43. छत्तीसगढ़ में OBC जनसंख्या का अनुमानित प्रतिशत कितना है?

(A) 40%
(B) 45%
(C) 52% ✅
(D) 60%

44. बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजाति कौन है?

(A) मुरिया ✅
(B) कोरवा
(C) उरांव
(D) कंवर

45. जनसंख्या के आधार पर सबसे छोटी जनजाति कौन-सी है?

(A) बिरहोर
(B) परजा ✅
(C) सौंता
(D) गदबा

46. परजा जनजाति की जनसंख्या कितनी है?

(A) 1,212 ✅
(B) 2,500
(C) 3,104
(D) 5,525

47. गदबा जनजाति किस भाषा परिवार से संबंधित है?

(A) आर्य
(B) आस्ट्रिक ✅
(C) द्रविड़
(D) तिब्बती

48. राजगोंड किस श्रेणी में आते हैं?

(A) अविकसित
(B) अल्प विकसित
(C) विकसित ✅
(D) आदिम

49. छत्तीसगढ़ की लगभग कितनी प्रतिशत आबादी SC, ST एवं OBC वर्ग से संबंधित है?

(A) 75%
(B) 85%
(C) 95% ✅
(D) 100%

50. छत्तीसगढ़ के जनजातीय इतिहास का प्रमुख आधार क्या है?

(A) शैलचित्र एवं गुफाएँ ✅
(B) समुद्री व्यापार
(C) विदेशी यात्राएँ
(D) रेलवे नेटवर्क

Answer Key:
1-B, 2-C, 3-C, 4-B, 5-B, 6-C, 7-B, 8-B, 9-C, 10-B, 11-B, 12-A, 13-B, 14-C, 15-C, 16-B, 17-B, 18-C, 19-C, 20-C, 21-B, 22-A, 23-A, 24-B, 25-C, 26-B, 27-C, 28-B, 29-C, 30-C, 31-C, 32-C, 33-A, 34-C, 35-C, 36-B, 37-C, 38-C, 39-B, 40-B, 41-B, 42-B, 43-C, 44-A, 45-B, 46-A, 47-B, 48-C, 49-C, 50-A

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