छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना: महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न-एक सरल और संपूर्ण अध्ययन
परिचय:
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छत्तीसगढ़ प्रायद्वीपीय भारत का एक भाग है जो प्राचीन गोंडवाना लैंड का हिस्सा है।
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किसी क्षेत्र में भूमि में स्थित विशिष्ट संरचना को भू-गर्भिक संरचना कहा जाता है, जिसका सीधा प्रभाव वहां की धरातलीय बनावट, खनिजों की उपलब्धता और कृषि पर पड़ता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक संरचना को मुख्य रूप से 6 शैल समूहों में बांटा जा सकता है:
1. आर्कियन शैल समूह (आद्य महाकल्पीय शैल समूह)
यह पृथ्वी का सबसे पुराना शैल समूह है।
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विस्तार: छत्तीसगढ़ में इसका विस्तार सर्वाधिक (लगभग 50 प्रतिशत) है। बस्तर पठार और दंडकारण्य का अधिकांश भाग इसी से निर्मित है।
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प्रमुख चट्टानें: इसमें मुख्य रूप से ग्रेनाइट, फेल्सपार, क्वार्ट्ज, अभ्रक और हार्नब्लैंड पाए जाते हैं।
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विशेषता: यह एक जीवाश्म रहित (Fossil-free) शैल समूह है।
2. धारवाड़ क्रम की चट्टानें
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निर्माण: ये चट्टानें लगभग 2.50 करोड़ वर्ष पुरानी हैं और इनका निर्माण आर्कियन चट्टानों के अपरदन (Erosion) से हुआ है।
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विस्तार: छत्तीसगढ़ में इसके विस्तार की 3 प्रमुख सीरीज हैं – दुर्ग संभाग में ‘चिल्फी घाटी सीरीज’, रायपुर संभाग में ‘सोनाखान सीरीज’ और बस्तर क्षेत्र में ‘लौह अयस्क सीरीज’।
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खनिज: यह खनिजों के मामले में सबसे समृद्ध शैल समूह है। यहाँ मुख्य रूप से लौह अयस्क, टिन और कोरंडम पाया जाता है।
3. कड़प्पा शैल समूह
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निर्माण: इसका निर्माण ग्रेनाइट चट्टानों के अपरदन से हुआ है और यह अवसादी (Sedimentary) क्रम का है।
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विस्तार: यह छत्तीसगढ़ का दूसरा सर्वाधिक विस्तृत शैल समूह है (लगभग 25-30 प्रतिशत)। इसका फैलाव मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के मैदानी भागों (महानदी बेसिन) में है।
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खनिज: इस समूह में चूना पत्थर, डोलोमाइट और क्वार्ट्ज बहुतायत में मिलते हैं। इसे ‘पुराना संघ’ के नाम से भी जाना जाता है।
4. विंध्यन शैल
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निर्माण: कड़प्पा संरचना के अवसादीकरण और निक्षेपीकरण (Deposition) से विंध्यन संरचना का विकास हुआ है।
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विशेषता: इसमें धात्विक खनिजों का अभाव होता है, लेकिन यह भवन निर्माण के पदार्थों (जैसे लाल बलुआ पत्थर और चूना पत्थर) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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विस्तार: छत्तीसगढ़ राज्य में इसका विस्तार बहुत कम या नगण्य रूप में है (कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर आदि क्षेत्रों में)।
5. गोण्डवाना शैल समूह
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निर्माण: नदियों की घाटियों में युगों से जमे वनस्पतियों और जीवों के अवशेषों (जीवाश्म) से इसका निर्माण हुआ है। इसका नामकरण मेटलीक कांट (1872) द्वारा किया गया था।
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विस्तार: यह राज्य के 17 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है, जिसमें मुख्य रूप से सरगुजा बेसिन और बघेलखंड का पठार शामिल है।
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खनिज: यह शैल समूह मुख्य रूप से कोयला उत्पादन के लिए जाना जाता है।
6. दक्कन ट्रैप शैल समूह
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निर्माण: मेसोजोइक कल्प में दरारी ज्वालामुखी प्रक्रिया से निकले बेसाल्ट युक्त लावा के जमने से इसका निर्माण हुआ है।
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विस्तार: मैकल श्रेणी के पूर्वी भाग, कोरबा, कबीरधाम, सरगुजा और जशपुर आदि में यह पाया जाता है।
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खनिज: इस क्षेत्र में मुख्य रूप से बॉक्साइट खनिज पाया जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: ध्यान रहे कि छत्तीसगढ़ में टरसरी (Tertiary) एवं क्वार्टरी (Quaternary) क्रम के शैल समूह नहीं पाए जाते हैं।
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छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना
यहाँ छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उनकी व्याख्या दी गई है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए हैं:
आर्कियन शैल समूह महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. निम्न कौन-सा शैल समूह सबसे प्राचीन तथा छत्तीसगढ़ की धरातलीय बनावट में प्रमुख है?
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(A) गोंडवाना
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(B) धारवाड़
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(C) आर्कियन
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(D) कड़प्पा
उत्तर- (C)
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व्याख्या- आर्कियन शैल समूह को आद्य महाकल्पीय शैल समूह भी कहा जाता है।
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आर्कियन का शाब्दिक अर्थ ‘सबसे प्राचीन’ होता है।
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छत्तीसगढ़ की धरातलीय बनावट में इस शैल समूह का सर्वाधिक विस्तार है।
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इस शैल का निर्माण तप्त पृथ्वी के ठण्डा होने के फलस्वरूप हुआ है।
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इसलिए इसमें जीवाश्म नहीं पाये जाते हैं।
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इसमें ग्रेनाइट और नीस प्रमुखता से पायी जाती है।
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इसका सर्वाधिक विस्तार महानदी घाटी की सीमांत उच्च भूमि में है साथ ही दण्डकारण्य (बस्तर का पठार) का अधिकांश भाग इसी शैल समूह से निर्मित है।
प्रश्न 5. छत्तीसगढ़ के निम्नलिखित भागों में कौन-सा सबसे पुरातन शैलों से बना है?
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(A) हसदेव-रामपुर बेसिन
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(B) रायपुर उच्चभूमि
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(C) बैलाडीला की पहाड़ियां
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(D) सरगुजा बेसिन
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(E) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (C)
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व्याख्या- छत्तीसगढ़ में बैलाडीला की पहाड़ियां सबसे पुरातन शैल समूह से बनी हैं।
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क्योंकि शैल निर्माण काल के आधार पर आर्कियन शैल के बाद धारवाड़ शैल का निर्माण हुआ है।
धारवाड़ शैल समूह महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 10. छत्तीसगढ़ की सोनाखान सीरीज निम्न में से किसमें शामिल है-
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(A) कड़प्पा
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(B) धारवाड़
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(C) आर्कियन्स
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(D) गोंडवाना
उत्तर- (B)
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व्याख्या- छत्तीसगढ़ में धारवाड़ शैल क्रम तीन सीरीज में प्राप्त होते हैं, जो कि निम्न हैं-
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दुर्ग संभाग- चिल्फी घाटी सीरीज
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रायपुर संभाग- सोनाखान सीरीज
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बस्तर संभाग- लौह अयस्क सीरीज
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नोट- सोनाखान सीरीज को सोनाखान संस्तर भी कहा जाता है।
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इसका नामकरण वर्ष 1899 ई. में एफ.एच. स्मिथ ने किया था।
कड़प्पा शैल समूह महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 12. छत्तीसगढ़ का मैदानी-भाग किस समूह की चट्टानों से निर्मित है?
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(A) कड़प्पा शैल समूह
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(B) गोंडवाना शैल समूह
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(C) धारवाड़ शैल समूह
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(D) विन्ध्यन शैल समूह
उत्तर- (A)
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व्याख्या- छत्तीसगढ़ के मैदानी भाग में लगभग 50 प्रतिशत चट्टानें कड़प्पा शैल समूह की हैं।
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इसलिए छत्तीसगढ़ का मैदानी भाग कड़प्पा शैल समूह से बना है।
विन्ध्यन शैल समूह महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 21. छत्तीसगढ़ में पाये जाने वाले चूना पत्थर किस समय के हैं?
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(A) निम्न विन्ध्यन
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(B) ऊपरी विन्ध्यन
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(C) गोंडवाना
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(D) टर्शियरी
उत्तर- (A)
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व्याख्या- छत्तीसगढ़ में पाये जाने वाले चूना पत्थर निम्न विन्ध्यन समय के हैं।
गोंडवाना शैल समूह महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 24. छत्तीसगढ़ में कोयला किस क्रम की चट्टानों में पाया जाता है?
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(A) गोंडवाना
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(B) आर्कियन
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(C) धारवाड़
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(D) विन्ध्यन
उत्तर- (A)
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व्याख्या- विभिन्न चट्टानों और उनसे प्राप्त खनिजों का विवरण इस प्रकार है:
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गोण्डवाना – कोयला
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कड़प्पा – चूना
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दक्कन ट्रैप – बॉक्साइट
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धारवाड़ – लोहा
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विन्ध्यन – हीरा
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दक्कन ट्रैप महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 27. लमेटा शैल समूह निम्नलिखित में से किस शैल समूह के अवसादों से निर्मित हुआ है?
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(A) आर्कियन शैल समूह
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(B) गोण्डवाना शैल समूह
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(C) कड़प्पा शैल समूह
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(D) दक्कन ट्रैप शैल समूह
उत्तर- (D)
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व्याख्या- दक्कन ट्रैप शैल समूहों के अवसादों से लमेटा शैल समूह का निर्माण हुआ है।
विविध महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 32. निम्नलिखित में से कौन-सी भूगर्भीय संरचना छत्तीसगढ़ में विद्यमान नहीं है?
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(A) कड़प्पा शैल समूह
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(B) गोंडवाना शैल समूह
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(C) धारवाड़ शैल समूह
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(D) टर्शियरी शैल समूह
उत्तर- (D)
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व्याख्या- टर्शियरी क्रम की चट्टानों का विस्तार हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में है।
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इसलिए यह छत्तीसगढ़ में विद्यमान नहीं है।
प्रश्न 35. सोनाखान संस्तर की चट्टानें किस रूप में हैं?
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(A) डाइक
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(B) सिल
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(C) शिट
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(D) साइनाट
उत्तर- (A)
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व्याख्या- सोनाखान संस्तर डाइक किस्म की चट्टानों में पाया जाता है।
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डाइक मध्यवर्ती चट्टानों के रूप में पाया जाता है, यह वास्तव में लावा के लम्बवत् दीवार रूपी संरचना होती है तथा इसका रंग गुलाबी होता है।










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