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CG GK : सोन या गंगा अपवाह तंत्र (Son or Ganga Drainage System) | छत्तीसगढ़ भूगोल | CGPSC Notes

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Table of Contents

सोन या गंगा अपवाह तंत्र (Son or Ganga Drainage System): छत्तीसगढ़ भूगोल की सम्पूर्ण जानकारी

छत्तीसगढ़ के अपवाह तंत्र में सोन या गंगा अपवाह तंत्र का महत्वपूर्ण स्थान है। यद्यपि गंगा नदी स्वयं छत्तीसगढ़ में प्रवाहित नहीं होती, लेकिन इसकी प्रमुख सहायक सोन नदी तथा उसकी सहायक नदियों का प्रवाह राज्य के उत्तर एवं उत्तर-पूर्वी भाग में होता है। इसी कारण इस क्षेत्र का जल अंततः गंगा नदी में जाकर मिलता है।

CGPSC, CG Vyapam, शिक्षक भर्ती, पटवारी, वनरक्षक एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सोन या गंगा अपवाह तंत्र से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।


सोन या गंगा अपवाह तंत्र क्या है?

जिस अपवाह तंत्र का जल अंततः गंगा नदी में जाकर मिलता है, उसे गंगा अपवाह तंत्र कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में यह कार्य मुख्यतः सोन नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा किया जाता है।

प्रमुख तथ्य

  • गंगा नदी छत्तीसगढ़ में नहीं बहती।
  • सोन नदी गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी है।
  • छत्तीसगढ़ के उत्तर एवं उत्तर-पूर्वी भाग का जल इसी अपवाह तंत्र में प्रवाहित होता है।
  • यह राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 13.63% भाग आवृत करता है।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 18.78 हजार वर्ग किलोमीटर है।
  • राज्य की तीसरी प्रमुख अपवाह प्रणाली मानी जाती है।

सोन नदी

परिचय

सोन नदी गंगा की सबसे महत्वपूर्ण दक्षिणी सहायक नदियों में से एक है। छत्तीसगढ़ में इसकी अनेक सहायक नदियाँ बहती हैं जो उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होकर अंततः उत्तर प्रदेश में सोन नदी से मिलती हैं।


उद्गम

  • छुरी मटिरंगा पहाड़ी (मैनपाट, सरगुजा)

संगम

  • उत्तर प्रदेश के रेणुकूट के पास सोन नदी में।

लंबाई

145 किलोमीटर (छत्तीसगढ़ में)


प्रवाह क्षेत्र

  • सरगुजा
  • सूरजपुर
  • बलरामपुर

प्रमुख सहायक नदियाँ

  • कनहर
  • गोपद
  • बनास
  • सुरिया
  • गोहरी

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सरगुजा की जीवन रेखा कहलाती है।
  • महेशपुर (सरगुजा) महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल इसके किनारे स्थित है।
  • यह नदी सरगुजा का प्राकृतिक विभाजन करती है।
  • उत्तर प्रदेश के रेणुकूट के निकट रिहंद बाँध क्षेत्र से होकर प्रवाहित होती है।

रिहंद नदी

उद्गम

  • देवगढ़ (कोरिया जिला)

विशेषताएँ

  • मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के मध्य सीमा बनाती है।
  • आगे चलकर उत्तर प्रदेश में सोन नदी से मिलती है।

गोपद नदी

उद्गम

  • सोनहत पठार (कोरिया जिला)

संगम

  • सोन नदी

प्रमुख सहायक नदियाँ

  • गोहिनी
  • सेहरा
  • केवई
  • महान
  • मेंदूर

विशेष तथ्य

  • मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की सीमा का निर्माण करती है।

कनहर नदी

उद्गम

  • बड़बोली चोटी, बगीचा तहसील (जशपुर)

संगम

  • उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सोन नदी

लंबाई

  • लगभग 115 किलोमीटर

प्रवाह क्षेत्र

  • जशपुर
  • बलरामपुर

दायाँ तट

  • सुरिया
  • चनान
  • मेंदूर
  • कुरिया

बायाँ तट

  • गलफुला
  • सेमरवार
  • गिरर
  • ईरी

महत्वपूर्ण तथ्य

  • झारखंड एवं छत्तीसगढ़ की सीमा का निर्माण करती है।
  • बलरामपुर के डीपाडीह पुरातात्विक स्थल का विकास इसके तट पर हुआ।
  • कोटली जलप्रपात एवं चनान नदी पर पर्वत जलप्रपात स्थित हैं।

बनास नदी

उद्गम

  • मांझोली पहाड़ी (भरतपुर, कोरिया)

प्रमुख सहायक नदियाँ

  • गोहिरारी
  • ओड़ारी
  • इमर
  • रम्पा
  • घुमाही
  • केसरार

प्रवाह

  • कोरिया जिले में बहती है।

संगम

  • मध्यप्रदेश के ग्राम डेफरा के निकट सोन नदी में।

सोन या गंगा अपवाह तंत्र का महत्व

यह अपवाह तंत्र—

  • उत्तर छत्तीसगढ़ की कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अनेक वन क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराता है।
  • राज्य के पुरातात्विक स्थलों के विकास में सहायक रहा है।
  • सोन नदी के माध्यम से गंगा बेसिन का हिस्सा बनता है।

FAQ (Schema Friendly)

Q1. छत्तीसगढ़ में गंगा नदी बहती है?

उत्तर: नहीं, गंगा नदी छत्तीसगढ़ में नहीं बहती।

Q2. सोन नदी का उद्गम कहाँ है?

उत्तर: सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित छुरी मटिरंगा पहाड़ी से।

Q3. सोन नदी किस नदी की सहायक है?

उत्तर: गंगा नदी की।

Q4. कनहर नदी का उद्गम कहाँ से होता है?

उत्तर: जशपुर जिले की बड़बोली चोटी से।

Q5. डीपाडीह पुरातात्विक स्थल किस नदी के किनारे स्थित है?

उत्तर: कनहर नदी के किनारे।

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