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सौंता जनजाति का इतिहास, संस्कृति और 26 MCQs | CG GK

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Table of Contents

सौंता जनजाति (Saunta Tribe): इतिहास, संस्कृति, रीति-रिवाज एवं 26 महत्वपूर्ण MCQs

सौंता जनजाति सामान्य ज्ञान (Saunta Tribe GK in Hindi) छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और इतिहास का एक महत्वपूर्ण विषय है। CGPSC, CG Vyapam, CGSSB तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए इस जनजाति की उत्पत्ति, निवास क्षेत्र, सामाजिक व्यवस्था, वेशभूषा, खान-पान, आर्थिक जीवन, विवाह संस्कार, धार्मिक मान्यताओं और लोकनृत्यों की जानकारी उपयोगी है।

इस लेख में सौंता जनजाति से संबंधित प्रमुख तथ्यों के साथ 26 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), उत्तर और व्याख्या दी गई हैं, जो आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।

1. सौंता जनजाति का सामान्य परिचय

सौंता जनजाति छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा में भी पाई जाती है। इसकी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में कृषि, वनोपज संग्रह, प्रकृति पूजा, पारंपरिक आभूषण तथा लोकनृत्यों का विशेष महत्व है।

2011 की जनगणना से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

विवरण जानकारी
कुल जनसंख्या 3,502
पुरुष जनसंख्या 1,760
महिला जनसंख्या 1,742
कुल साक्षरता दर 33.0%
पुरुष साक्षरता दर 40.4%
महिला साक्षरता दर 25.5%
प्रमुख निवास क्षेत्र सूरजपुर, सरगुजा, बिलासपुर एवं कोरबा
अन्य निवास क्षेत्र रायगढ़

नोट: इन आंकड़ों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित जनगणना तालिका या जनजातीय अध्ययन के मूल स्रोत से सत्यापित करें।

2. सौंता जनजाति की उत्पत्ति

सौंता जनजाति की उत्पत्ति के संबंध में दो प्रमुख लोकमान्यताओं का उल्लेख मिलता है।

पहली मान्यता: लोककथा के अनुसार, सौंता जनजाति का संबंध ओडिशा के जगन्नाथपुरी से माना जाता है। कहा जाता है कि पुरी के राजा की सेना में खंडायत जाति के दो भाई सैनिक थे। छोटे भाई द्वारा एक स्थानीय आदिवासी महिला से विवाह करने के बाद उसे समाज से अलग कर दिया गया। लोककथा के अनुसार, छोटे भाई की संतानें आगे चलकर सौंता कहलाने लगीं।

दूसरी मान्यता: एक अन्य लोककथा के अनुसार, किसी आदिवासी समूह के कुछ सदस्यों के मूल समुदाय से अलग होने के बाद सौंता समुदाय का निर्माण हुआ।

ये उत्पत्ति संबंधी कथाएं लोकपरंपराओं पर आधारित हैं; इन्हें प्रमाणित लिखित इतिहास के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।

3. निवास क्षेत्र एवं आवास व्यवस्था

सौंता जनजाति के लोग सामान्यतः गोंड, धनवार और कंवर जैसे समुदायों के साथ गांवों में निवास करते हैं। पारंपरिक गांवों में कच्चे रास्तों के दोनों ओर मिट्टी के घर बने होते हैं।

इनके पारंपरिक घरों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • घर सामान्यतः मिट्टी के बने होते हैं।
  • छत पर घास-फूस या देशी खपरैल का उपयोग किया जाता है।
  • दीवारों पर पीली या सफेद मिट्टी से पुताई की जाती है।
  • फर्श को गोबर से लीपने की परंपरा रही है।
  • घर में सामान्यतः दो कमरे तथा सामने परछी यानी बरामदा होता है।
  • मुख्य कमरे में देवस्थान और अनाज रखने के लिए मिट्टी की कोठी हो सकती है।
  • पशुओं को बांधने के लिए घर के पास कोठा बनाया जाता है।

4. वेशभूषा एवं पारंपरिक आभूषण

सौंता जनजाति की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।

पुरुषों की वेशभूषा: पंछा, सलूका, बंडी, धोती और कुरता।

महिलाओं की वेशभूषा: लुगड़ा-पोलका। महिलाएं पारंपरिक रूप से बालों का जूड़ा बनाती हैं।

प्रमुख आभूषण:

  • पैरों में सांटी, पैरपट्टी और बिछिया।
  • कमर में करधन।
  • हाथों में कांच की चूड़ियां, पटा और बांहों में पहुंची।
  • गले में सुरड़ा, रुपिया माला और चैनमाला।
  • कानों में खिनवा तथा नाक में फूली।

गोदना की परंपरा

सौंता जनजाति की महिलाओं में गोदना बनवाने की परंपरा का विशेष महत्व बताया जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, गोदना को शरीर के साथ जाने वाला स्थायी गहना माना जाता है।

5. खान-पान की परंपरा

सौंता जनजाति का पारंपरिक भोजन स्थानीय कृषि उपज और वन संसाधनों पर आधारित रहा है।

मुख्य खाद्य पदार्थ:

  • कोदो और चावल का भात।
  • मौसमी सब्जियां तथा जंगली भाजी।
  • उड़द, मूंग और कुलथी की दाल।
  • जंगली कंदमूल, फल और अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थ।

मांसाहार: पारंपरिक खान-पान में अंडे, मछली, मुर्गी, बकरे और खरगोश का मांस शामिल बताया जाता है।

6. आर्थिक जीवन एवं प्रमुख व्यवसाय

सौंता जनजाति का पारंपरिक आर्थिक जीवन कृषि, मजदूरी, वनोपज संग्रह और बांस से उपयोगी वस्तुएं बनाने से जुड़ा रहा है।

प्रमुख आर्थिक गतिविधियां

  1. कृषि: कोदो, कुटकी, धान, मूंग, उड़द, अरहर, तिवड़ा और तिल जैसी फसलों की खेती।
  2. कृषि मजदूरी: कम भूमि या भूमिहीन परिवारों के लिए मजदूरी आजीविका का साधन रही है।
  3. वनोपज संग्रह: महुआ, चार, गोंद, तेंदूपत्ता, हर्रा और लाख का संग्रह।
  4. बांस शिल्प: बांस से टोकरा-टोकरी जैसी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण।
  5. मछली पकड़ना: वर्षा ऋतु में घरेलू उपयोग के लिए मछली पकड़ने की परंपरा।

वन्यजीव संरक्षण और लागू कानूनों के कारण शिकार संबंधी गतिविधियों पर कानूनी प्रतिबंधों का पालन करना आवश्यक है।

7. सामाजिक संगठन, उपजातियां एवं गोत्र

सौंता समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था पितृवंशीय, पितृसत्तात्मक और पितृ-निवास परंपरा से संबंधित बताई जाती है।

सौंता जनजाति की दो प्रमुख उपजातियां

1. छत्तीसगढ़िया सौंता: इस समूह को कई पीढ़ियों से छत्तीसगढ़ में निवास करने वाला तथा मुख्यतः छत्तीसगढ़ी बोलने वाला बताया जाता है।

2. उड़िया सौंता: इस समूह का संबंध ओडिशा से प्रवास करके छत्तीसगढ़ आने वाले परिवारों से बताया जाता है। इनके परिवारों में उड़िया भाषा का प्रयोग मिलता है।

प्रमुख गोत्र

सौंता जनजाति के प्रमुख गोत्रों में धुरवा, पोन्दरू, मरकाम, सोनवानी, तेलासी, लबदरिया, सिराठिया, भैंसा, सुआ और बाघ आदि के नाम बताए जाते हैं।

कुछ गोत्रों का संबंध टोटम परंपरा से माना जाता है, जिसमें प्राकृतिक वस्तुओं, जीव-जंतुओं या अन्य प्रतीकों को वंश की पहचान के रूप में महत्व दिया जाता है।

8. जन्म, विवाह एवं मृत्यु संस्कार

जन्म संस्कार

पारंपरिक मान्यताओं में संतानोत्पत्ति को ईश्वर की देन माना जाता है। परंपरागत रूप से घर पर प्रसव कराने वाली महिला को सुइन दाई कहा जाता है।

जन्म के छठे दिन छठी संस्कार आयोजित करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इस अवसर पर जच्चा-बच्चा को स्नान कराया जाता है, देवी-देवताओं को प्रणाम किया जाता है और रिश्तेदारों को भोजन कराया जाता है।

पारंपरिक प्रसवोत्तर देखभाल में विभिन्न जड़ी-बूटियों और खाद्य पदार्थों से बने काढ़े का उल्लेख मिलता है। हालांकि, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान सुरक्षित चिकित्सा देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की सहायता लेना आवश्यक है।

विवाह संस्कार

सौंता जनजाति में विवाह से संबंधित पारंपरिक रीति-रिवाजों में निम्नलिखित का उल्लेख मिलता है:

  • सूक धरना: विवाह के समय वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष को अनाज, दाल, गुड़, तेल तथा कुछ नकद राशि देने की परंपरा।
  • विवाह के चार चरण: मंगनी, फलदान, विवाह और गौना।
  • फेरा: पारंपरिक विवरण के अनुसार, विवाह में फेरा लगाने की रस्म सौंता समाज का मुखिया संपन्न कराता है।
  • गुरावट विवाह: विनिमय विवाह की परंपरा।
  • लमसेना विवाह: सेवा विवाह से संबंधित परंपरा।

पुराने नृवंशशास्त्रीय विवरणों में कम उम्र में विवाह का उल्लेख मिलता है। ये ऐतिहासिक विवरण वर्तमान में विवाह की स्वीकार्य आयु नहीं हैं। भारत में विवाह के लिए लागू कानूनी न्यूनतम आयु का पालन करना अनिवार्य है।

मृत्यु संस्कार

परंपरागत विवरणों के अनुसार, सौंता जनजाति में सामान्यतः मृतक को दफनाया जाता है, जबकि कुछ संपन्न या प्रतिष्ठित व्यक्तियों के दाह संस्कार का भी उल्लेख मिलता है।

मृत्यु के दसवें दिन दशगात्र संस्कार किया जाता है। इस दौरान घर की शुद्धि, पूर्वजों की पूजा और रिश्तेदारों को भोजन कराने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। समुदाय में पुनर्जन्म संबंधी मान्यताओं का भी वर्णन किया गया है।

9. परंपरागत जाति पंचायत

सौंता जनजाति की पारंपरिक पंचायत के प्रमुख को गोंटिया कहा जाता है। पारंपरिक विवरणों में इस पद को वंशानुगत बताया गया है।

पंचायत के प्रमुख कार्यों में विवाह संबंधी विवादों का समाधान, सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन, देवी-देवताओं की पूजा की व्यवस्था और समुदाय के पारंपरिक नियमों से जुड़े मामलों का निपटारा शामिल रहा है।

10. धार्मिक मान्यताएं एवं प्रमुख देवी-देवता

सौंता जनजाति की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं में प्रकृति पूजा और ग्राम देवताओं का विशेष स्थान है।

प्रमुख देवी-देवता:

  • ठाकुरदेव
  • बूढ़ादेव
  • ग्रामदेवती
  • धरम देवता
  • डिहारिन माई
  • खूंट देव
  • शीतला माता
  • कंकालिन माता
  • बाघदेव और नागदेव
  • सूरज नारायण, चंद्रमा और धरती माता

समय के साथ अनेक परिवारों में राम, कृष्ण, शिव, हनुमान और दुर्गा जैसे हिंदू देवी-देवताओं की पूजा भी प्रचलित है।

11. प्रमुख त्योहार, लोकनृत्य एवं लोकगीत

प्रमुख त्योहार

सौंता जनजाति के पारंपरिक त्योहारों में हरेली, रथ दूज, पोला, पितर, नवाखानी, दशहरा, दिवाली और होली का उल्लेख मिलता है।

प्रमुख लोकनृत्य

लोकनृत्य अवसर या विशेषता
करमा नृत्य करमा पूजा के अवसर पर युवक-युवतियों द्वारा
बिहाव नाच विवाह समारोह में
पड़की नृत्य दिवाली के अवसर पर युवतियों द्वारा
रहस नाच होली के अवसर पर युवकों द्वारा

प्रमुख लोकगीत एवं वाद्ययंत्र

बिहाव गीत, करमा गीत और सुआ गीत प्रमुख लोकगीतों में शामिल बताए जाते हैं। पारंपरिक नृत्य-संगीत में ढोल, मांदर और मंजीरा जैसे वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाता है।

12. सौंता जनजाति के महत्वपूर्ण तथ्य: एक नजर में

  • उत्पत्ति की लोकमान्यता: जगन्नाथपुरी, ओडिशा।
  • पारंपरिक पंचायत का प्रमुख: गोंटिया।
  • विवाह के समय दिए जाने वाले पारंपरिक वधू मूल्य का नाम: सूक धरना।
  • घर के सामने बने बरामदे का नाम: परछी।
  • पारंपरिक प्रसव सहायक: सुइन दाई।
  • जन्म के छठे दिन का संस्कार: छठी।
  • विवाह के चार चरण: मंगनी, फलदान, विवाह और गौना।
  • विनिमय विवाह: गुरावट।
  • सेवा विवाह: लमसेना।
  • दिवाली का पारंपरिक नृत्य: पड़की नृत्य।
  • होली का पारंपरिक नृत्य: रहस नाच।
  • प्रमुख वाद्ययंत्र: ढोल, मांदर और मंजीरा।
  • प्रमुख व्यवसाय: कृषि, मजदूरी, वनोपज संग्रह और बांस शिल्प।

निष्कर्ष

सौंता जनजाति की सामाजिक संरचना, लोककथाएं, पारंपरिक वेशभूषा, गोदना, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, धार्मिक मान्यताएं और लोकनृत्य छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलू हैं। CGPSC, CG Vyapam और CGSSB जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय इन तथ्यों का अध्ययन करना उपयोगी हो सकता है।

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि जनसंख्या, साक्षरता और जनजाति की आधिकारिक स्थिति से संबंधित आंकड़ों को प्रकाशित करने या परीक्षा में उपयोग करने से पहले संबंधित सरकारी स्रोतों से सत्यापित करें।

अस्वीकरण: यह लेख शैक्षणिक एवं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। समुदाय की परंपराएं समय, स्थान और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

13. सौंता जनजाति के 26 महत्वपूर्ण MCQs (उत्तर एवं व्याख्या सहित)

ये प्रश्न CGPSC, CG Vyapam, CGSSB और छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान की तैयारी के लिए उपयोगी अभ्यास सामग्री हैं।

प्रश्न 1. 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में सौंता जनजाति की कुल जनसंख्या कितनी बताई गई है?

(A) 2,502
(B) 3,502
(C) 4,105
(D) 3,890

सही उत्तर: (B) 3,502

व्याख्या: दिए गए जनजातीय विवरण के अनुसार सौंता जनजाति की कुल जनसंख्या 3,502 बताई गई है। परीक्षा में उपयोग करने से पहले मूल जनगणना स्रोत से इस आंकड़े की पुष्टि करें।

प्रश्न 2. सौंता जनजाति की पारंपरिक जाति पंचायत के मुखिया को क्या कहा जाता है?

(A) पटेल
(B) मांझी
(C) गोंटिया
(D) मड़िया

सही उत्तर: (C) गोंटिया

व्याख्या: सौंता जनजाति की पारंपरिक पंचायत के प्रमुख को गोंटिया कहा जाता है। पारंपरिक रूप से पंचायत सामाजिक विवादों के निपटारे में भूमिका निभाती थी।

प्रश्न 3. सौंता जनजाति में विवाह के समय वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष को दिए जाने वाले पारंपरिक वधू मूल्य को क्या कहा जाता है?

(A) सुक मूल्य
(B) सूक धरना
(C) पायसोतुर
(D) पठौनी

सही उत्तर: (B) सूक धरना

व्याख्या: पारंपरिक विवरण के अनुसार, सूक धरना में अनाज, दाल, गुड़, तेल और कुछ नकद राशि दी जाती थी।

प्रश्न 4. लोकमान्यता के अनुसार सौंता जनजाति अपनी उत्पत्ति किस स्थान से जोड़ती है?

(A) बस्तर
(B) जगन्नाथपुरी
(C) अमरकंटक
(D) छोटानागपुर

सही उत्तर: (B) जगन्नाथपुरी

व्याख्या: एक प्रचलित उत्पत्ति कथा में सौंता जनजाति का संबंध ओडिशा के जगन्नाथपुरी और खंडायत सैनिकों की कथा से बताया जाता है।

प्रश्न 5. दिवाली के अवसर पर सौंता जनजाति की युवतियों द्वारा कौन-सा नृत्य किए जाने का उल्लेख मिलता है?

(A) रहस नृत्य
(B) पड़की नृत्य
(C) दमनच नृत्य
(D) शैला नृत्य

सही उत्तर: (B) पड़की नृत्य

व्याख्या: दिए गए पारंपरिक विवरण में पड़की नृत्य को दिवाली के अवसर पर युवतियों द्वारा किया जाने वाला नृत्य बताया गया है।

प्रश्न 6. उपलब्ध विवरण के अनुसार सौंता जनजाति की कुल साक्षरता दर कितनी बताई गई है?

(A) 25.5%
(B) 33.0%
(C) 40.4%
(D) 38.2%

सही उत्तर: (B) 33.0%

व्याख्या: दिए गए आंकड़ों में कुल साक्षरता दर 33.0%, पुरुष साक्षरता 40.4% और महिला साक्षरता 25.5% बताई गई है। आधिकारिक स्रोत से सत्यापन आवश्यक है।

प्रश्न 7. छत्तीसगढ़ में सौंता जनजाति के प्रमुख निवास क्षेत्रों में कौन-से जिले बताए गए हैं?

(A) बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर
(B) सूरजपुर, सरगुजा, बिलासपुर और कोरबा
(C) राजनांदगांव, कबीरधाम, दुर्ग और बालोद
(D) धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद और रायपुर

सही उत्तर: (B) सूरजपुर, सरगुजा, बिलासपुर और कोरबा

व्याख्या: दिए गए विवरण में सूरजपुर, सरगुजा, बिलासपुर और कोरबा को प्रमुख निवास क्षेत्र बताया गया है।

प्रश्न 8. सौंता जनजाति की उत्पत्ति से जुड़ी लोककथा में पुरी के राजा की सेना के सैनिक किस जाति के बताए गए हैं?

(A) पाइक
(B) खंडायत
(C) कलिंग
(D) गोंड

सही उत्तर: (B) खंडायत

व्याख्या: प्रचलित लोककथा में दो खंडायत सैनिक भाइयों का उल्लेख मिलता है। यह जनजाति की उत्पत्ति से संबंधित लोकमान्यता है।

प्रश्न 9. सौंता जनजाति के पारंपरिक घर में कमरों के आगे बने बरामदे को क्या कहा जाता है?

(A) कोठा
(B) परछी
(C) ओसारी
(D) मड़वा

सही उत्तर: (B) परछी

व्याख्या: परछी घर के सामने बना बरामदा होता है, जिसका उपयोग बैठने और घरेलू गतिविधियों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 10. सौंता जनजाति की महिलाएं किसे शरीर के साथ जाने वाला स्थायी गहना मानती हैं?

(A) बिछिया
(B) करधन
(C) गोदना
(D) खिनवा

सही उत्तर: (C) गोदना

व्याख्या: गोदना यानी पारंपरिक टैटू को स्थायी शारीरिक अलंकरण माना जाता है। इसका सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व है।

प्रश्न 11. सौंता जनजाति के पारंपरिक आभूषणों में खिनवा और सुरड़ा क्रमशः कहां पहने जाते हैं?

(A) नाक और कान
(B) कान और गला
(C) हाथ और पैर
(D) कमर और बांह

सही उत्तर: (B) कान और गला

व्याख्या: दिए गए विवरण के अनुसार खिनवा कान में और सुरड़ा गले में पहना जाने वाला आभूषण है।

प्रश्न 12. भाषा और प्रवास के आधार पर सौंता जनजाति की बताई गई दो प्रमुख उपजातियां कौन-सी हैं?

(A) छत्तीसगढ़िया सौंता और उड़िया सौंता
(B) सरगुजिया सौंता और बस्तरिया सौंता
(C) सिंदुरिया सौंता और तेलिया सौंता
(D) राज सौंता और धुर सौंता

सही उत्तर: (A) छत्तीसगढ़िया सौंता और उड़िया सौंता

व्याख्या: पारंपरिक विवरण में छत्तीसगढ़िया सौंता और उड़िया सौंता का विभाजन निवास, प्रवास और भाषा के आधार पर बताया गया है।

प्रश्न 13. निम्नलिखित में से कौन-से सौंता जनजाति के प्रमुख गोत्र बताए गए हैं?

(A) धुरवा, पोन्दरू और मरकाम
(B) सोनवानी, तेलासी और लबदरिया
(C) सिराठिया, भैंसा, सुआ और बाघ
(D) उपर्युक्त सभी

सही उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी

व्याख्या: दिए गए विवरण में इन सभी नामों का उल्लेख सौंता जनजाति के प्रमुख गोत्रों के रूप में किया गया है।

प्रश्न 14. सौंता जनजाति की पारंपरिक व्यवस्था में घर पर प्रसव कराने वाली महिला को क्या कहा जाता है?

(A) सिरहा
(B) सुइन दाई
(C) बैगिन
(D) कोटवारिन

सही उत्तर: (B) सुइन दाई

व्याख्या: सुइन दाई पारंपरिक प्रसव सहायता देने वाली महिला को कहा जाता है। वर्तमान में प्रसव के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षित चिकित्सा सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 15. सौंता जनजाति में बच्चे के जन्म के कितने दिन बाद छठी संस्कार किए जाने का उल्लेख मिलता है?

(A) तीसरे दिन
(B) पांचवें दिन
(C) छठे दिन
(D) बारहवें दिन

सही उत्तर: (C) छठे दिन

व्याख्या: पारंपरिक मान्यता के अनुसार जन्म के छठे दिन छठी संस्कार किया जाता है।

प्रश्न 16. सौंता जनजाति के पारंपरिक विवाह के चार चरण कौन-से बताए गए हैं?

(A) मंगनी, विवाह और गौना
(B) मंगनी, फलदान, विवाह और गौना
(C) फलदान, मंगनी, गौना और विवाह
(D) सगाई और विवाह

सही उत्तर: (B) मंगनी, फलदान, विवाह और गौना

व्याख्या: दिए गए विवरण में विवाह की प्रक्रिया को इन चार चरणों में विभाजित किया गया है।

प्रश्न 17. सौंता जनजाति के पारंपरिक विवाह में फेरा लगाने की रस्म कौन संपन्न कराता है?

(A) ब्राह्मण पुरोहित
(B) सौंता जाति का मुखिया
(C) लड़के का मामा
(D) गांव का बैगा

सही उत्तर: (B) सौंता जाति का मुखिया

व्याख्या: पारंपरिक विवरण के अनुसार विवाह में फेरा लगाने की रस्म समाज का मुखिया संपन्न कराता है।

प्रश्न 18. सौंता जनजाति के पुराने विवरण में विवाह की पारंपरिक आयु क्या बताई गई है?

(A) लड़के 18–21 वर्ष, लड़कियां 16–18 वर्ष
(B) लड़के 12–18 वर्ष, लड़कियां 10–16 वर्ष
(C) लड़के 15–20 वर्ष, लड़कियां 12–18 वर्ष
(D) लड़के 20–25 वर्ष, लड़कियां 18–22 वर्ष

सही उत्तर: (B) दिए गए पुराने विवरण के अनुसार

व्याख्या: यह विकल्प केवल दिए गए पुराने विवरण को दर्शाता है, वर्तमान विवाह आयु को नहीं। भारत में कानूनी न्यूनतम विवाह आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष है।

प्रश्न 19. सौंता जनजाति के पारंपरिक मृत्यु संस्कारों के संबंध में कौन-सा कथन सही है?

(A) सामान्यतः मृतक को दफनाने का उल्लेख मिलता है।
(B) दसवें दिन दशगात्र संस्कार का उल्लेख मिलता है।
(C) पुनर्जन्म में विश्वास की परंपरा का वर्णन मिलता है।
(D) उपर्युक्त सभी।

सही उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी

व्याख्या: दिए गए जनजातीय विवरण में दफनाने, दशगात्र और पुनर्जन्म से संबंधित तीनों परंपराओं का उल्लेख है।

प्रश्न 20. सौंता जनजाति के युवकों द्वारा होली के अवसर पर कौन-सा नृत्य किए जाने का उल्लेख मिलता है?

(A) पड़की नृत्य
(B) रहस नाच
(C) बिहाव नाच
(D) सुआ नृत्य

सही उत्तर: (B) रहस नाच

व्याख्या: दिए गए विवरण के अनुसार रहस नाच होली के अवसर पर युवकों द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 21. सौंता जनजाति के पारंपरिक नृत्यों में प्रमुख वाद्ययंत्र कौन-से बताए गए हैं?

(A) ढोल, मांदर और मंजीरा
(B) तंबूरा, खंजेरी और बांसुरी
(C) टिमकी, मोहरी और तुड़बुड़ी
(D) धनकुल, चिटकुल और अलगोजा

सही उत्तर: (A) ढोल, मांदर और मंजीरा

व्याख्या: ढोल, मांदर और मंजीरा पारंपरिक नृत्य-संगीत में प्रयुक्त वाद्ययंत्रों के रूप में बताए गए हैं।

प्रश्न 22. दिए गए आंकड़ों के अनुसार सौंता जनजाति में पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता दर क्रमशः कितनी है?

(A) 45.2% और 28.4%
(B) 40.4% और 25.5%
(C) 33.0% और 20.5%
(D) 50.1% और 30.2%

सही उत्तर: (B) 40.4% और 25.5%

व्याख्या: उपलब्ध विवरण में पुरुष साक्षरता दर 40.4% तथा महिला साक्षरता दर 25.5% बताई गई है। इन आंकड़ों का आधिकारिक सत्यापन करें।

प्रश्न 23. दिए गए आंकड़ों के अनुसार सौंता जनजाति की पुरुष और महिला जनसंख्या कितनी बताई गई है?

(A) 1,800 और 1,702
(B) 1,760 और 1,742
(C) 1,742 और 1,760
(D) 1,650 और 1,852

सही उत्तर: (B) 1,760 और 1,742

व्याख्या: दिए गए विवरण में पुरुषों की संख्या 1,760 और महिलाओं की संख्या 1,742 बताई गई है। कुल संख्या 3,502 होती है।

प्रश्न 24. सौंता जनजाति के प्रमुख पारंपरिक आर्थिक व्यवसाय कौन-से हैं?

(A) केवल लौह शिल्प
(B) कृषि, मजदूरी, वनोपज संग्रह और बांस के बर्तन बनाना
(C) केवल कत्था निकालना
(D) केवल पशुपालन और दूध बेचना

सही उत्तर: (B) कृषि, मजदूरी, वनोपज संग्रह और बांस के बर्तन बनाना

व्याख्या: पारंपरिक आर्थिक जीवन में खेती, कृषि मजदूरी, वन संसाधनों का संग्रह और बांस शिल्प का विशेष स्थान बताया गया है।

प्रश्न 25. दिए गए पारंपरिक विवरण में प्रसव के बाद प्रसूता को किस प्रकार के काढ़े का उल्लेख मिलता है?

(A) कुलथी, छिंद की जड़, सरई की छाल, ऐंठी मुर्री, गोंद, सोंठ और गुड़
(B) केवल तुलसी, अदरक और काली मिर्च
(C) नीम की पत्ती, हर्रा और बहेड़ा
(D) महुआ, चार और तेंदू की छाल

सही उत्तर: (A) दिए गए पारंपरिक विवरण के अनुसार

व्याख्या: पारंपरिक प्रसवोत्तर देखभाल में इन सामग्रियों से बने काढ़े का उल्लेख है। यह लोकपरंपरा का विवरण है, प्रमाणित चिकित्सकीय उपचार की सलाह नहीं।

प्रश्न 26. निम्नलिखित में से कौन-से सौंता जनजाति के प्रमुख देवी-देवता बताए गए हैं?

(A) ठाकुरदेव, बूढ़ादेव, ग्रामदेवती और धरम देवता
(B) डिहारिन माई, खूंट देव, शीतला माता और कंकालिन माता
(C) सूरज नारायण, धरती माता, बाघदेव और नागदेव
(D) उपर्युक्त सभी

सही उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी

व्याख्या: सौंता जनजाति की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं में ग्राम देवताओं, प्रकृति से जुड़े प्रतीकों और विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा का उल्लेख मिलता है।

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