छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपात: जिलेवार सूची एवं महत्वपूर्ण जानकारी
छत्तीसगढ़ को अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ियों, नदियों और मनमोहक जलप्रपातों के लिए जाना जाता है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक छोटे-बड़े जलप्रपात स्थित हैं, जो न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं बल्कि CGPSC, CG Vyapam, CGSSB तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
इस लेख में छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपातों की जिलेवार जानकारी, उनकी नदियों, स्थान और विशेषताओं के साथ दी गई है।
बस्तर जिले के प्रमुख जलप्रपात
1. चित्रकोट जलप्रपात
चित्रकोट जलप्रपात इंद्रावती नदी पर स्थित छत्तीसगढ़ का सबसे प्रसिद्ध जलप्रपात है। इसकी चौड़ाई लगभग 300 फीट और ऊँचाई लगभग 90 फीट बताई जाती है। घोड़े की नाल जैसी आकृति के कारण इसे “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है।
वर्षा ऋतु में जलप्रवाह बढ़ने के कारण इसका स्वरूप अत्यंत आकर्षक हो जाता है। चाँदनी रात में जलप्रपात का दृश्य विशेष रूप से मनमोहक दिखाई देता है।
नदी: इंद्रावती
विशेष नाम: भारत का नियाग्रा
विशेषता: छत्तीसगढ़ का प्रमुख एवं सबसे चौड़ा जलप्रपात
2. तीरथगढ़ जलप्रपात
तीरथगढ़ जलप्रपात कांगेर घाटी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध जलप्रपात है। यहाँ पानी प्राकृतिक चट्टानों पर सीढ़ीनुमा रूप में नीचे गिरता है। इसकी ऊँचाई लगभग 300 फीट बताई जाती है।
यह जलप्रपात कुटुमसर गुफा के आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
विशेषता: सीढ़ीनुमा जलप्रपात और कांगेर घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य
3. कांगेरधारा जलप्रपात
कांगेर नदी पर स्थित कांगेरधारा जलप्रपात लगभग 20 फीट ऊँचा है। यह कांगेर घाटी क्षेत्र के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षणों में से एक है।
4. तामड़ाघूमर जलप्रपात
तामड़ाघूमर, जिसे मयूरा जलप्रपात भी कहा जाता है, विनता घाटी में तामड़ाबहार नाला पर स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 125 फीट बताई जाती है। क्षेत्र में मोरों की उपस्थिति के कारण इसे मयूरा नाम से भी जाना जाता है।
विशेष नाम: मिनी नियाग्रा
5. अन्य प्रमुख जलप्रपात
बस्तर क्षेत्र में मंडवा घूमर, चित्रधारा और महादेव घूमर भी प्रमुख जलप्रपात हैं।
दंतेवाड़ा जिले के प्रमुख जलप्रपात
सूरतगढ़ जलप्रपात
सूरतगढ़ जलप्रपात शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम क्षेत्र में स्थित है। इसे स्थानीय रूप से हाथी दरहा प्रपात भी कहा जाता है।
मंदेनीघूमर जलप्रपात
यह चित्रकोट-बारसूर मार्ग पर सेंदरी गाँव के समीप मटरानाला पर स्थित है।
मिलकुलवाड़ा–हांदावाड़ा जलप्रपात
यह गोदरानाला पर स्थित है और स्थानीय रूप से गोदर घूमर या गोयेदर घूमर के नाम से जाना जाता है।
बीजापुर जिले के प्रमुख जलप्रपात
सातधारा जलप्रपात
सातधारा जलप्रपात इंद्रावती नदी पर स्थित है। इसे ससधारा भी कहा जाता है। इसकी सात धाराओं के नाम हैं—
- शिवधारा
- शिव चित्रधारा
- कृष्णधारा
- पांडवधारा
- बाणधारा
- बोधधारा
- कपिलधारा
बोगतुंग जलप्रपात
यह बोगतुंग नदी पर कोड़ेपल्ली, भोपालपटनम के समीप स्थित है।
लंकापल्ली जलप्रपात
लंकापल्ली जलप्रपात चिंतावागु नदी पर उसूर तहसील के लंकापल्ली गाँव के समीप स्थित है। इसे सातकुंडी या सातकुंडों का प्रपात भी कहा जाता है। यहाँ पानी गिरकर क्रमशः सात कुंडों का निर्माण करता है।
सुकमा जिले के प्रमुख जलप्रपात
गुप्तेश्वर जलप्रपात
यह शबरी नदी पर माचकोट क्षेत्र में स्थित है और एनएच-43 के आसपास का प्रमुख प्राकृतिक स्थल है।
शबरीबरहा जलप्रपात
यह शबरी नदी पर लालनार गाँव के समीप स्थित है।
मलगेर इंदुल जलप्रपात
यह शबरी नदी की सहायक मलगेर नदी पर स्थित है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के प्रमुख जलप्रपात
अमृतधारा जलप्रपात
अमृतधारा जलप्रपात हसदेव नदी पर स्थित है। यह मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इसके समीप तापसी बाबा का आश्रम भी बताया जाता है।
अकुरीनाला जलप्रपात
यह बंसीपुर गाँव के समीप स्थित है। इसे “कोरिया का एयरकंडीशनर” भी कहा जाता है।
गावरघाट एवं औराघाट
दोनों जलप्रपात हसदेव नदी से संबंधित हैं। औराघाट ग्राम तर्रा के समीप स्थित है।
रक्सदाह/रामदाह जलप्रपात
यह बनास नदी पर भंवरखोह गाँव के समीप स्थित है।
सूरजपुर जिले के प्रमुख जलप्रपात
रक्सगंडा जलप्रपात
रक्सगंडा जलप्रपात रिहंद नदी पर स्थित है।
कुंदरूघाघ
कुंदरूघाघ पिंगला नदी पर स्थित है। स्थानीय बोली में जलप्रपात को घाघ कहा जाता है।
सरगुजा जिले के प्रमुख जलप्रपात
सरभंजा जलप्रपात
यह मांड नदी पर मैनपाट क्षेत्र में टाइगर हिल के पास स्थित है।
टाईगर प्वाईंट जलप्रपात
यह मैनपाट क्षेत्र में महादेवमुड़ा नदी पर स्थित है।
सेदम जलप्रपात
सेदम जलप्रपात बतौली नदी पर स्थित प्रमुख प्राकृतिक स्थल है।
बलरामपुर जिले के प्रमुख जलप्रपात
कोठली जलप्रपात
यह कन्हार नदी पर डीपाडीह के समीप स्थित है।
पवई जलप्रपात
पवई जलप्रपात सेमरसोत अभ्यारण्य क्षेत्र में चिनार/चनान नदी पर स्थित है। अधिक जलप्रवाह के समय इसका स्वरूप अत्यंत आकर्षक हो जाता है और इसे धुआंधार भी कहा जाता है।
वेनगंगा जलप्रपात
वेनगंगा नदी पर स्थित इस जलप्रपात के आसपास गंगा दशहरा के अवसर पर धार्मिक आयोजन किया जाता है।
भेड़िया पत्थर जलप्रपात
यह ईदरी गाँव के समीप भेड़िया नाला पर स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग 200 फीट बताई जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार प्रपात के समीप स्थित गुफा में भेड़िये छिपते थे, इसलिए इसका नाम भेड़िया पत्थर पड़ा।
जशपुर जिले के प्रमुख जलप्रपात
रानीदाह जलप्रपात
रानीदाह जलप्रपात से जुड़ी स्थानीय जनश्रुति के अनुसार उड़ीसा की रानी शिरोमणि ने मनपसंद विवाह न होने के कारण यहाँ आत्मदाह किया था। जलप्रपात के समीप पंचभैया स्थल भी प्रसिद्ध है।
खुल्लू प्रपात
यह ईब नदी पर गुल्लू गाँव के समीप बादलखोल अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित है।
छूरी जलप्रपात
छूरी जलप्रपात भी ईब नदी पर स्थित है। इसके आसपास वन क्षेत्र होने के कारण यहाँ हाथियों का विचरण देखा जाता है।
मकरभंजा जलप्रपात
यह महनई के समीप स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 400 फीट बताई जाती है।
कोरबा जिले के प्रमुख जलप्रपात
केंदई जलप्रपात
केंदई जलप्रपात केंदई नदी पर कटघोरा क्षेत्र में स्थित है।
देवपहरी जलप्रपात
देवपहरी चोरनई नदी पर स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थल है।
रायगढ़ जिले का प्रमुख जलप्रपात
रामझरना
रामझरना माडुसिल्ली, बरमकेला क्षेत्र में स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान जब माता सीता को प्यास लगी, तब भगवान राम ने बाण से धरती को भेदकर जलधारा उत्पन्न की थी।
महासमुंद जिले का प्रमुख जलप्रपात
सात देवधारा
सात देवधारा जलप्रपात बलमदेई नदी पर स्थित है।
गरियाबंद जिले के प्रमुख जलप्रपात
गोदना जलप्रपात
यह उदंती नदी पर स्थित है।
घटारानी एवं जतमई
गरियाबंद जिले में घटारानी और जतमई भी प्रसिद्ध जलप्रपात एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल हैं।
कांकेर जिले के प्रमुख जलप्रपात
मलाजकुण्डम जलप्रपात
मलाजकुण्डम जलप्रपात दूध नदी पर स्थित है। मुख्य जलप्रपात तक पहुँचने से पहले तीन सीढ़ीनुमा जलप्रपात दिखाई देते हैं।
चर्रे-मर्रे जलप्रपात
चर्रे-मर्रे जलप्रपात पिंजाडिन घाटी में कुतरी/अंतागढ़ नदी पर स्थित है। इसे “कांकेर का मुकुट” कहा जाता है।
यहाँ चट्टानों में बने गड्ढों को स्थानीय भाषा में कड़ाही खोदरा कहा जाता है।
पिंजाडिन जलप्रपात
यह पिंजाडिन नदी पर स्थित है।
मुत्तेखड़का घूमर
स्थानीय भाषा में ‘मुत्ते’ का अर्थ औरत तथा ‘खड़का’ का अर्थ प्रवाह बताया जाता है। जलप्रपात की आकृति के कारण इसका नाम मुत्तेखड़का घूमर पड़ा।
नारायणपुर जिले के प्रमुख जलप्रपात
खुरसेल झरना
यह खुरसेल नदी पर गुड़ाबेड़ा गाँव के समीप स्थित है।
नोगोबाबा जलप्रपात
यह झारा घाटी में स्थित प्रमुख प्राकृतिक जलप्रपात है।
कबीरधाम जिले का प्रमुख जलप्रपात
रानीदरहा
रानीदरहा जलप्रपात भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित है। प्राकृतिक वातावरण और आसपास के वन क्षेत्र के कारण यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| जलप्रपात | नदी/स्थान | महत्वपूर्ण पहचान |
|---|---|---|
| चित्रकोट | इंद्रावती नदी | भारत का नियाग्रा |
| तीरथगढ़ | कांगेर घाटी क्षेत्र | प्रमुख सीढ़ीनुमा जलप्रपात |
| कांगेरधारा | कांगेर नदी | लगभग 20 फीट |
| तामड़ाघूमर | तामड़ाबहार नाला | मिनी नियाग्रा |
| सातधारा | इंद्रावती नदी | सात धाराएँ |
| रक्सगंडा | रिहंद नदी | सूरजपुर |
| अमृतधारा | हसदेव नदी | MCB क्षेत्र |
| सरभंजा | मांड नदी | मैनपाट |
| केंदई | केंदई नदी | कोरबा |
| रामझरना | माडुसिल्ली क्षेत्र | धार्मिक मान्यता |
| सात देवधारा | बलमदेई नदी | महासमुंद |
| गोदना | उदंती नदी | गरियाबंद |
| चर्रे-मर्रे | कुतरी/अंतागढ़ नदी | कांकेर का मुकुट |
| मलाजकुण्डम | दूध नदी | तीन सीढ़ीनुमा प्रपात |
| रानीदरहा | भोरमदेव अभ्यारण्य | कबीरधाम |
छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपात – 75 MCQ प्रश्न एवं उत्तर
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के जलप्रपात राज्य की प्राकृतिक एवं भौगोलिक विविधता को दर्शाते हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, अमृतधारा, रक्सगंडा, सरभंजा, केंदई, चर्रे-मर्रे, मलाजकुण्डम और सातधारा जैसे जलप्रपात पर्यटन के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
CGPSC, CG Vyapam, CGSSB और छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को जलप्रपातों के साथ उनकी संबंधित नदी, जिला और विशेष उपनाम जरूर याद रखने चाहिए।














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